Anjani Soren
रांची। दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन की पुत्री और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजनी सोरेन झारखंड से राज्यसभा जा सकती हैं। गुरुजी के निधन के बाद रिक्त हुई उनकी सीट से अंजनी सोरेन के राज्यसभा जाने की चर्चा शुरू हो गई है।
21 जून 2026 तक है कार्यकाल
झारखंड से राज्यसभा की 6 सीटों में से एक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के कारण खाली है। उनका निधन पिछले साल 4 अगस्त 2025 को हुआ था। उनका कार्यकाल 21 जून 2026 तक का था। बता दें कि राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है। उनके साथ भाजपा के दीपक प्रकाश का भी कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म होगा। यानी आगामी दिनों में झारखंड से राज्यसभा के लिए 2 सीटों के लिए प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
गुरुजी का उत्तराधिकारी बन सकती हैं बेटी अंजनी
शिबू सोरेन के निधन के बाद से उनके राज्यसभा उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। गुरुजी के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी बेटी अंजनी सोरेन को देखा जा रहा है। झामुमो के कार्यकर्ताओं का मानना है कि अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए, क्योंकि उनके कुशल नेतृत्व में झामुमो ओडिशा में मजबूत हुआ है। वैसे भी उनको राज्यसभा भेजना राजनीति से ज्यादा भावनात्मक महत्व रखता है। शिबू सोरेन अपने साथ जो विरासत छोड़ कर गए हैं, उसे उसी परिवार का कोई सदस्य ही आगे ले जा सकता है। लोकसभा या राज्यसभा में सोरेन परिवार का प्रतिनिधित्व फिलहाल नहीं है, ऐसे में अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजकर झामुमो अपने संस्थापक नेता की विरासत को आगे बढ़ा सकता है।
राजनीति विरासत में मिली है अंजनी को
शिबू सोरेन और रूपी सोरेन के 4 संतान में अंजनी सोरेन दुर्गा सोरेन से छोटी और हेमंत सोरेन से बड़ी हैं। शादी के बाद ओडिशा के मयूरभंज में रहकर झामुमो को सांगठनिक रूप से मजबूत करने में लगी रहीं। इसके अलावा उन्होंने आदिवासियों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। ओड़िशा में पार्टी को मजबूत करने में उन्होंने ग्रास रूट पर काम किया है। पार्टी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में मयूरभंज सीट से उम्मीदवार बनाया था, हालांकि वो चुनाव नहीं जीत पाईं थी, लेकिन अपने पारंपरिक वोटों की घेराबंदी उन्होंने बड़ी मजबूती से की थी। उन्होंने 2019 का चुनाव भी लड़ा था।
राज्यसभा में जीत के लिए जरूरी आंकड़ा
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में I.N.D.I.A. गठबंधन के झामुमो के सर्वाधिक 34, कांग्रेस 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक हैं। वहीं भाजपा के पास 21 विधायक हैं। ऐसे में जीतने वाले 27 के आंकड़े से ज्यादा की संख्या झामुमो के पास है। हालांकि अंजनी सोरेन के नाम पर अंतिम मुहर लगाने का फैसला झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन को लेना है।


















