बिहार में विदेशी वोटर्स की एंट्री से बढ़ा सियासी ताप, SIR प्रक्रिया पर बवाल

Anjali Kumari
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Assembly elections:

पटना, एजेंसियां। पटना बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस अभियान में सामने आया है कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो गए हैं। आयोग ने साफ किया है कि 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम वोटर लिस्ट से ऐसे नाम हटा दिए जाएंगे।

सीमांचल के चार जिलों

यह कदम सीमांचल के चार जिलों किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया, जो कि मुस्लिम बहुल इलाके हैं में सबसे ज्यादा असर डाल सकता है। इन 4 जिलों में विधानसभा की 24 सीटें हैं, जिनमें 2020 के चुनाव में AIMIM, महागठबंधन और NDA को साझा रूप से जीत मिली थी। सीमांचल में मुस्लिम आबादी 46% तक है, वहीं आधार कार्ड कवरेज 100% से भी अधिक बताया गया है।

विपक्षी दलों, खासकर राजद और कांग्रेस

विपक्षी दलों, खासकर राजद और कांग्रेस, को आशंका है कि अगर अवैध नाम हटे तो वोट प्रतिशत में बदलाव आएगा, जिससे चुनावी नतीजों पर सीधा असर पड़ेगा। 2020 के चुनाव में 83 सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का अंतर 10,000 वोटों से भी कम था। RJD का दावा है कि महज 1% नाम कटने से 8 लाख वोटर प्रभावित होंगे।

तेजस्वी यादव ने SIR को “राजनीतिक चाल” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया निष्पक्ष है और अवैध नाम हटाना ज़रूरी है। चुनावी परिणामों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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