“गुरु बिना गति नहीं” , जानिए गुरु पूर्णिमा पर पूजन, परंपरा और पुण्य कार्य [“There is no progress without Guru”, know about worship, tradition and good deeds on Guru Purnima]

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Guru Purnima:

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज यानि 10 जुलाई को पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें वेदों का संपादक, 18 पुराणों और महाभारत के रचयिता माना जाता है। गुरु पूर्णिमा तिथि की बात करें तो यह तिथि 10 जुलाई को रात 1:36 बजे आरंभ होकर 11 जुलाई को रात 2:06 बजे समाप्त होगी। चूंकि वैदिक मान्यता के अनुसार पर्व उदया तिथि पर मनाया जाता है, इसलिए गुरु पूर्णिमा आज, 10 जुलाई को ही मनाई जा रही है।

Guru Purnima:गुरु का महत्व: भगवान भी बने शिष्य

इस दिन की विशेषता यह है कि स्वयं भगवानों ने भी गुरुओं का सम्मान किया:
भगवान राम ने ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त की।
श्रीकृष्ण गुरु सांदीपनि के शिष्य बने।
हनुमान जी ने सूर्य देव को गुरु बनाया।
भगवान दत्तात्रेय ने 24 जीवों को अपना गुरु माना।

Guru Purnima:पूजन विधि और परंपरा

सुबह स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर वेदव्यास जी का स्मरण करें। वेद, भागवत या गीता जैसे ग्रंथों का पाठ करें।
यदि गुरु सशरीर हैं, तो उन्हें आसन पर बैठाकर चंदन, अक्षत, पुष्प, फल, मिठाई अर्पित करें और चरण पूजन करें। यदि गुरु नहीं हैं, तो उनकी पादुका या चित्र की पूजा करें, या किसी आध्यात्मिक ग्रंथ को गुरु मानकर पाठ प्रारंभ करें।

Guru Purnima:विशेष पुण्य कार्य

इस दिन ग्रंथ दान, अन्नदान, वस्त्र व चप्पल का दान, गौ सेवा, शिव पूजन, हनुमान चालीसा पाठ और श्रीकृष्ण को तुलसी सहित माखन-मिश्री का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।

Guru Purnima:वर्षा ऋतु और चातुर्मास का आरंभ

पुराणों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा से वर्षा ऋतु और चातुर्मास का आरंभ होता है, जब साधु-संत एक स्थान पर रुककर धर्मोपदेश देते हैं।

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