Prime Minister’s offer: 22 भाषाओं के ज्ञाता संत ने ठुकराई प्रधानमंत्री की पेशकश, जानिए वजह

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नई दिल्ली, एजेंसियां। जगद्गुरु रामभद्राचार्य हाल ही में मेरठ में दिए गए अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने पश्चिमी यूपी को “मिनी पाकिस्तान” करार देते हुए दावा किया कि हिंदुओं को यहां से पलायन करना पड़ रहा है। इससे पहले भी वे प्रेमानंद महाराज को संस्कृत बोलने की चुनौती और डॉ. भीमराव अंबेडकर पर टिप्पणी के चलते विवादों में रहे हैं।

22 भाषाओं के ज्ञाता लेकिन दिव्यांग संत

दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामभद्राचार्य संस्कृत सहित 22 भाषाओं का गहरा ज्ञान रखते हैं। पांच साल की उम्र में उन्होंने पूरी भगवद्गीता कंठस्थ कर ली थी।

इंदिरा गांधी से जुड़ा प्रसंग

हाल ही में एक पॉडकास्ट में उन्होंने 1974 की एक घटना का जिक्र किया। अखिल भारतीय संस्कृत प्रतियोगिता में पांचों विषयों में पहला स्थान पाने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनकी प्रतिभा से प्रभावित हुईं। उन्होंने उनकी आंखों का इलाज कराने की इच्छा जताई, लेकिन रामभद्राचार्य ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उनका कहना था कि संसार देखने योग्य नहीं है, उनकी चाह सिर्फ भगवान राम का दर्शन करने की है।

बचपन से ही खो दी थी दृष्टि

14 जनवरी 1950 को जौनपुर, उत्तर प्रदेश में जन्मे रामभद्राचार्य का असली नाम गिरिधर मिश्रा है। दो माह की उम्र में ट्रेकोमा बीमारी के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। बावजूद इसके, दादा से मिली शिक्षा ने उन्हें संस्कृत विद्या का महाज्ञाता बना दिया।

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