नगर निकाय चुनाव में आम लोगों की एंट्री, बदलना चाहते हैं अपने मोहल्ले की तस्वीर

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Nikay Chunav

रांची। इस बार का नगर निकाय चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है। आमतौर पर चुनाव का नाम आते ही लोगों के मन में यह धारणा बनती है कि उम्मीदवार वही होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो या जिनकी राजनीतिक पहुंच हो। लेकिन इस बार नामांकन प्रक्रिया के दौरान एक अलग तस्वीर सामने आई है।

बड़ी संख्या में जमीनी स्तर से जुड़े लोग वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए सामने आए हैं।चुनाव मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों में नाई, शिक्षक और इलेक्ट्रीशियन जैसे पेशों से जुड़े लोग शामिल हैं। ये उम्मीदवार अपने मोहल्लों की समस्याओं को नजदीक से देखने और समझने का दावा करते हुए बदलाव की उम्मीद लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि टूटी सड़कें, जाम नालियां, स्ट्रीट लाइट की कमी और साफ-सफाई जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, लेकिन इनका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

वार्ड नंबर-38

इस बार चुनाव में ऐसे तीन वार्ड सामने आए है जहां आम लोगों ने अपने इलाके की तस्वीर बदलने की कोशिश में जुटे है। बता दे वार्ड नंबर-38 से अजय ठाकुर, जो पेशे से नाई हैं, पार्षद पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। अजय ठाकुर का कहना है कि उन्होंने वर्षों से अपने इलाके की मूलभूत समस्याओं को करीब से देखा है। उनका मानना है कि अगर स्थानीय लोग खुद आगे नहीं आएंगे, तो समस्याएं सिर्फ वादों तक सीमित रह जाएंगी। वे जल निकासी, सड़क, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था को अपनी प्राथमिकता बता रहे हैं।

वार्ड नंबर-14

वहीं वार्ड नंबर-14 से अंजू कुमारी, जो पेशे से शिक्षिका हैं और घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं, भी पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। उनका कहना है कि समाज की सेवा और लोगों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अंजू कुमारी का मानना है कि आम नागरिकों की भागीदारी से ही स्थानीय शासन मजबूत हो सकता है और जमीनी समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।

वार्ड नंबर-34

अंत में वार्ड नंबर-34 से मुकेश मिर्धा, जो पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं, भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मुकेश का कहना है कि उनकी पहचान राजनीति से नहीं बल्कि उनके काम और लोगों से जुड़ाव से है। वे अपने अनुभव के आधार पर जनता की आवाज बनने का दावा कर रहे हैं।

इस बार नगर निकाय चुनाव में आम लोगों की बढ़ती भागीदारी स्थानीय लोकतंत्र के मजबूत होने का संकेत दे रही है। जमीनी स्तर के उम्मीदवारों की मौजूदगी से चुनाव में नए मुद्दे और नई उम्मीदें जुड़ती दिखाई दे रही हैं।

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