World Radio Day
नई दिल्ली, एजेंसियां। मोबाइल और डिजिटल युग के आगमन के बाद बहुत से घरों में अब रेडियो शायद ही नजर आता हो। लेकिन 20वीं सदी में हर घर में रेडियो हुआ करता था और लोग पूरे ध्यान से रेडियो प्रोग्राम सुनते थे। इन्हीं यादों को संजोते हुए हर साल 13 फरवरी को वर्ल्ड रेडियो डे मनाया जाता है। रेडियो ने दशकों तक लोगों को जानकारी, मनोरंजन और समाज से जोड़ने का काम किया है।
वर्ल्ड रेडियो डे की शुरुआत
रेडियो डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव 2011 में रखा गया। इसके बाद 2012 में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी। 13 फरवरी की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि 1946 में अमेरिका से पहली बार रेडियो ट्रांसमिशन किया गया था और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने भी रेडियो प्रसारण शुरू किया।
असम में रेडियो की यात्रा
आसाम में रेडियो की शुरूआत आकाशवाणी गुवाहाटी से 1948 में हुई। धीरे-धीरे तेजपुर, सिलचर और दिलबर्ग में भी रेडियो स्टेशन स्थापित किए गए। 2000 के बाद कम्यूनिटी रेडियो भी शुरू हुआ, जिससे स्थानीय लोगों को अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।
इस साल की थीम और खास कार्यक्रम
इस साल रेडियो डे की थीम “Radio and Climate Change” है। इसके तहत चर्चा होगी कि रेडियो किस तरह पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा कर सकता है। इस मौके पर ऑल इंडिया रेडियो गुवाहाटी एक खास शो आयोजित कर रहा है, जिसमें आम लोग जाकर अपना टैलेंट—सिंगिंग, डांसिंग, एक्टिंग या पोयम दिखा सकते हैं। गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर अबानी कुमार भागाबती इस सेशन को कंडक्ट करेंगे।
तकनीकी बदलाव और डिजिटल युग
समय के साथ रेडियो ने भी कई बदलाव देखे हैं। पहले प्रोग्राम टेप्स और ग्रामोफोन के जरिए सुने जाते थे, फिर सीडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जगह बनाई। आज रेडियो डिजिटल रूप में उपलब्ध है और इसे मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के जरिए आसानी से सुना जा सकता है।World Radio Day का उद्देश्य न केवल रेडियो के ऐतिहासिक महत्व को याद करना है, बल्कि यह दिखाना भी है कि रेडियो आज भी लोगों को जोड़ने और सामाजिक संदेश पहुँचाने का एक प्रभावी माध्यम है।








