World Radio Day:
नई दिल्ली, एजेंसियां। वर्ल्ड रेडियो डे हर साल 13 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिन 13 फरवरी 1946 को अमेरिका में पहली बार रेडियो ट्रांसमिशन और संयुक्त राष्ट्र रेडियो की शुरुआत की याद दिलाता है। भारत में पहली बार रेडियो का प्रसारण जून 1923 में बॉम्बे रेडियो क्लब ने किया था। एक समय में रेडियो सूचना और मनोरंजन का प्रमुख माध्यम था।
कांग्रेस रेडियो का गठन और उद्देश्य
1942 में महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान के बाद देश में आंदोलन की लहर और ब्रिटिश दमन बढ़ गया। अखबारों पर पाबंदी और नेताओं की गिरफ्तारी के बीच स्वतंत्रता संग्राम की आवाज़ दबाई जा रही थी। ऐसे समय में कुछ क्रांतिकारियों ने गुप्त रूप से कांग्रेस रेडियो की स्थापना की। इस रेडियो ने देशवासियों तक आज़ादी के आंदोलन की खबरें और संदेश पहुंचाए।
प्रसारण की शुरुआत और संचालन
9 अगस्त 1942 को मुंबई में युवाओं की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भाषणों को रेडियो के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाया जाए। बाबूभाई खाखड़, विट्ठलदास झवेरी, ऊषा मेहता और नरीमन अबराबाद ने इसे चलाने की जिम्मेदारी ली। चौपाटी में सी व्यू बिल्डिंग के किराए के घर से 13 अगस्त की रात प्रायोगिक प्रसारण शुरू हुआ। 14 अगस्त को पहली बार प्रसारण में सुनाई दिया: “यह कांग्रेस रेडियो है, आप हमें भारत के किसी स्थान से सुन रहे हैं।”
ब्रिटिश दमन और रेडियो का प्रभाव
कांग्रेस रेडियो के प्रसारण से देशवासियों में आजादी के प्रति नया उत्साह आया। अंग्रेजों के कानों तक इस रेडियो की आवाज़ पहुँच गई और उन्होंने इसे बंद करने के लिए 12 नवंबर 1942 को महालक्ष्मी में छापा मारा। बाबूभाई खाखड़, चंद्रकांत झवेरी और ऊषा मेहता को जेल हुई। करीब 80 दिनों तक चला यह गुप्त प्रसारण जनता में आजादी के प्रति जुनून जगाने में सफल रहा। कांग्रेस रेडियो ने स्वतंत्रता संग्राम में सूचना और प्रेरणा का नया मार्ग खोला। इसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी और देशवासियों को 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी तक प्रेरित किया।
