World Cancer Day 2026
नई दिल्ली, एजेंसियां। विश्व कैंसर दिवस 2026 के मौके पर सामने आई दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में दिल्ली में कैंसर से होने वाली हर तीन में से एक मौत 44 साल से कम उम्र के लोगों में हुई है। यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं।
WHO के अनुसार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर दुनिया भर में मौत का एक बड़ा कारण है। साल 2020 में करीब एक करोड़ लोगों की मौत कैंसर से हुई थी। ब्रेस्ट, फेफड़े, कोलन, रेक्टम और प्रोस्टेट कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं।
पिछले 20 वर्षों में कैंसर से 1.1 लाख से अधिक लोगों की मौत
दिल्ली की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 20 वर्षों में कैंसर से 1.1 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। साल 2005 में जहां करीब 2,000 मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 7,400 तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में कैंसर से मौतों की संख्या सालाना औसतन 7% की दर से बढ़ रही है, जो जनसंख्या वृद्धि से कहीं ज्यादा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे देर से निदान, स्क्रीनिंग की कमी, तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन, प्रदूषण, तनाव और खराब लाइफस्टाइल प्रमुख कारण हैं। डॉक्टरों का कहना है कि युवा अक्सर गांठ, असामान्य ब्लीडिंग, लगातार मुंह के छाले या आवाज में बदलाव जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का पता एडवांस स्टेज में चलता है।
पुरुषों में कैंसर से मौत के मामले महिलाओं से ज्यादा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पुरुषों में कैंसर से मौत के मामले महिलाओं की तुलना में ज्यादा हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट, फेफड़े और मुंह-गले के कैंसर सबसे ज्यादा घातक साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने समय से स्क्रीनिंग, जागरूकता बढ़ाने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि अगर शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान हो जाए, तो न सिर्फ इलाज आसान होता है बल्कि जान बचने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।








