Coconut broken: क्यों फोड़ा जाता है नारियल? जानिए शास्त्र और विज्ञान की नजर से

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Coconut broken:

नई दिल्ली, एजेंसियां। हिंदू धर्म में नारियल (Coconut) फोड़ने की परंपरा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह शास्त्रों, ज्योतिष और विज्ञान के अनुसार भी अत्यंत महत्वपूर्ण और अर्थपूर्ण मानी जाती है। किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, व्यापार प्रारंभ, या मंदिर प्रवेश — से पहले नारियल फोड़ने की परंपरा शुभता, शुद्धता और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक मानी जाती है।

शास्त्रीय महत्व:

श्रीफल: स्कंद पुराण व अग्नि पुराण में नारियल को श्रीफल कहा गया है, यानी ‘लक्ष्मी का फल’। यह सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।
त्रिमूर्ति दर्शन: नारियल के तीन नेत्र ब्रह्मा (सृजन), विष्णु (पालन) और शिव (संहार) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
श्लोक प्रमाण: “श्रीफलं ब्रह्मसंपन्नं सर्वकार्येषु पूजितम्” नारियल को ब्रह्मतत्व से युक्त और सभी शुभ कार्यों में पूज्य माना गया है।

ज्योतिषीय मान्यता:

ग्रह दोष निवारण: नारियल को बहते जल में प्रवाहित करने से शनि, राहु, केतु जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
शनिवार विशेष: पीपल के नीचे नारियल फोड़ने से शनि दोष और बाधाएं दूर होती हैं।
अमावस्या और नवमी: इन तिथियों पर नारियल अर्पण अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है।

वैज्ञानिक व मनोवैज्ञानिक कारण:

शुद्धता: नारियल का जल जीवाणुरहित होता है और शुद्धता का प्रतीक है।
अहंकार का त्याग: कठोर खोल हमारा अहंकार और नकारात्मक विचार दर्शाता है — इसका टूटना आत्मशुद्धि का प्रतीक है।
ध्यान केंद्रित करता है: नारियल फोड़ने की तेज आवाज पूजा में मानसिक एकाग्रता बढ़ाती है।

सांस्कृतिक परंपराएं:

दक्षिण भारत: मंदिर में प्रवेश से पहले नारियल फोड़ना अनिवार्य परंपरा है।
केरल और तमिलनाडु: पूजा में नारियल नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जाता है।
बौद्ध संस्कृति: नारियल आत्मिक शांति और शुद्ध दान का प्रतीक है।

नारियल फोड़ना कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि यह धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत सार्थक कार्य है। यह एक संदेश देता है — अहंकार तोड़ो, शुद्ध बनो और शुभ ऊर्जा को आमंत्रित करो।

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