US-India Trade Deal
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रेमवर्क को लेकर व्हाइट हाउस की फैक्टशीट में एक बड़ी चूक सामने आई। शुरुआती संस्करण में दावा किया गया था कि भारत ‘अपना डिजिटल सर्विस टैक्स हटा देगा’, जिसे आमतौर पर ‘गूगल टैक्स’ कहा जाता है। हालांकि बाद में संशोधित फैक्टशीट से यह लाइन हटा दी गई, जिसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई।
क्या है मामला?
दरअसल, भारत ने डिजिटल विज्ञापन सेवाएं देने वाली विदेशी टेक कंपनियों पर लगने वाला 6% इक्वलाइजेशन लेवी पहले ही समाप्त कर दिया था। यह फैसला फाइनेंस बिल 2025 के तहत लिया गया और 1 अप्रैल 2025 से लागू हुआ—यानी भारत-अमेरिका ट्रेड फ्रेमवर्क की घोषणा से करीब 10 महीने पहले।
संशोधित फैक्टशीट में अब सिर्फ इतना कहा गया है कि भारत डिजिटल व्यापार से जुड़े नियमों पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है।
‘गूगल टैक्स’ 2016 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत में कमाई करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों से टैक्स वसूलना था, भले ही उनकी यहां भौतिक मौजूदगी न हो। अमेरिका लंबे समय से इसे अपनी टेक कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताता रहा है।
सरकार के अनुसार
सरकार का कहना है कि टैक्स हटाने का कदम व्यापारिक तनाव कम करने के लिए उठाया गया था। हालांकि भारतीय पक्ष स्पष्ट कर चुका है कि भविष्य में टैक्स नीति तय करना देश का संप्रभु अधिकार है और इसे किसी भी व्यापार समझौते में बाध्य नहीं किया जा सकता।















