कृषि भूमि अथवा आवासीय भूमि खरीदने के समय आपने जमीन का दाखिल ख़ारिज या म्युटेशन की प्रक्रिया के बारे में जरूर सुना होगा।
दाखिल खारिज
यह प्रक्रिया किसी भी व्यक्ति के लिये भूमि खरीदने के उपरान्त रजिस्ट्रेशन करवाने के समय की जाने वाली एक अनिवार्य प्रक्रिया है।
इसको पूरा किये बिना कोई भी व्यक्ति अपनी भूमि का पूर्णं रूप से स्वामी नहीं बन सकता है।
हमारे देश में कृषि भूमि अथवा आवासीय भूमि का हस्तांतरण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को होता है, अतः आपको बताते है की भूमि के दाखिल ख़ारिज या म्युटेशन की प्रक्रिया क्यों जरुरी है और कैसे की जाती है।
दाखिल खारिज की प्रक्रिया
देश के किसी भी राज्य में संपत्ति का हस्तांतरण एक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत उसके कानूनी हक दार को ट्रांसफर किया जाता है।
इसके तहत परिवार के मुखिया जिसके नाम पर भूमि है, को हटा कर उसके पुत्र अथवा पुत्री का नाम लैंड रिकॉर्ड में दर्ज करवाया जाता है।
इसी प्रक्रिया को ही दाखिल ख़ारिज कहा जाता है अमूमन लोग किसी जमीन, मकान या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री् कराकर निश्चिंत हो जाते हैं।
लेकिन, आपको यह पता होना चाहिए कि जमीन की रजिस्ट्री् कराने भर से ही इस पर आपको पूरी तरह कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
अगर किसी प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज (Mutation of Property) नहीं कराया गया तो इस पर आपको पूरी तरह कानूनी हक नहीं मिल सकेगा।
लिहाजा प्रॉपर्टी खरीदने के मामले में यह जरूरी है कि आपको रजिस्ट्री के कुछ समय बाद उसका दाखिल-खारिज कराना होगा।
दाखिल खारिज क्या है?
दाखिल-खारिज एक ऐसा दस्तावेज है जो आपकी प्रॉपर्टी को किसी भी तरह के पचड़े से बचाने में मदद करता है।
अगर आपकी प्रॉपर्टी का दाखिल-खारिज हो गया है तो इसका मतलब है कि किसी को इस बाते से आपत्ति नहीं है कि आपने वह जमीन या घर खरीद लिया है।
मान लीजिए आपने एक जमीन खरीदी। वह जमीन आपके पास आने से पहले 4 और लोगों के पास रही थी।
अब अगर इनमें से एक भी शख्स ने कोर्ट में जाकर आपके खिलाफ मुकदमा दायर किया कि वह इस खरीद-बिक्री के खिलाफ है और आपके पास दाखिल-खारिज दस्तावेज नहीं हुए तो आपके लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
दाखिल-खारिज नहीं होने का मतलब है कि उस जगह पर कोई विवाद चल रहा था और जिसने आपको जमीन बेची उसने पुराने मालिक के साथ धोखाधड़ी की है।
इस तरह जमीन पर आपके मालिकाना हक पर प्रश्न चिह्न लग जाएगा। दाखिल-खारिज होने का मतलब है कि नगर निगम के दस्तावेजों में प्रॉपर्टी का टाइटल चेंज हो गया है और अब आप उसके कानूनी रूप से सही मालिक हैं।
रजिस्ट्रेशन में प्रॉपर्टी को नए खरीदार को ट्रांसफर किया जाता है। इसमें रजिस्ट्रेशन चार्ज और स्टैंप ड्यूटी देनी होता है।
वहीं, म्यूटेशन या दाखिल-खारिज कुछ महीनों बाद नगर निगम के दफ्तर में होता है। म्यूटेशन रिकॉर्ड देखकर आप जमीन के पिछले मालिकों के बारे में भी पता लगा सकते हैं।
जमीन बेचते समय यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। अगर आपने रजिस्ट्री करा भी ली है और कुछ महीने बाद म्यूटेशन नहीं कराया तो कानूनी रूप से जमीन पर आपका अधिकार नहीं माना जाएगा।
अगर भविष्य में आपकी वह जमीन किसी ,सरकारी अधिग्रहण के अंतर्गत आई तो आपको मुआवजा भी नहीं मिलेगा।
आपने अक्सर सुना होगा कि सरकार के द्धारा कभी-कभी किसी ख़ास परियोजना या फिर किसी सरकारी काम के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जाता है, ऐसे स्थिति में उन व्यक्तियों को ही मुआवजे की रकम प्राप्ति होती है जिनका नाम दाखिल ख़ारिज की प्रक्रिया के तहत लैंड रिकॉर्ड में दर्ज होता है।
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