West Bengal teacher recruitment scam
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में खुलासा हुआ है कि कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 25,000 सहायक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रिश्वत लेकर की गई थीं। भर्ती की तय समय-सीमा खत्म होने के बाद भी नियुक्ति पत्र जारी किए जाते रहे। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2024 को इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को “दूषित और दागदार” करार देते हुए सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया था।
ईडी की बड़ी कार्रवाई, 698 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अब तक कुल 698 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या अटैच की है। हालिया कार्रवाई में करीब 57.78 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। ये संपत्तियां विधायक जीवन कृष्ण साहा, प्रसन्ना कुमार रॉय और अन्य आरोपियों के नाम पर दर्ज हैं। इनमें कोलकाता, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद और पूर्वी बर्धमान जिलों में स्थित फ्लैट, विला और जमीन शामिल हैं।
OMR शीट और इंटरव्यू अंकों में हेराफेरी
ईडी की जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में OMR शीट और व्यक्तित्व परीक्षण के अंकों में हेरफेर का आरोप है। जांच में सामने आया कि अयोग्य उम्मीदवारों से भारी रिश्वत लेकर उन्हें नौकरी दिलाई गई। इस घोटाले में प्रसन्ना कुमार रॉय को मुख्य बिचौलिया बताया गया है, जिन्होंने अपने नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध राशि इकट्ठा की।
राजनीतिक कनेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग
जांच में टीएमसी विधायक जीवन कृष्ण साहा की भूमिका भी उजागर हुई है। उन पर अवैध धन संग्रह और उसके लेन-देन में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। ईडी ने अगस्त 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था। मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए यह धन कंपनियों और बैंक खातों के जटिल नेटवर्क से होकर अचल संपत्तियों में लगाया गया।
भर्ती घोटालों पर कड़ी नजर
ईडी ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल में शिक्षक और ग्रुप C-D भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों में जांच जारी रहेगी और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

