West Bengal SIR Row: मतदाता सूची सुधार की सुनवाई चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती

Anjali Kumari
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West Bengal SIR Row

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूची सुधार का सुनवाई चरण चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने कहा है कि आपत्तियों और विसंगतियों पर सुनवाई की प्रक्रिया अब तक पूरी हुई गणना (एन्यूमेरशन) से कहीं अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण होगी।

करोड़ों फॉर्म, लाखों विसंगतियां

पीटीआई से बातचीत में सुब्रत गुप्ता ने बताया कि 2025 की मतदाता सूची के आधार पर राज्य में 7.66 करोड़ एन्यूमेरशन फॉर्म वितरित किए गए थे। इनमें से करीब 58 लाख फॉर्म अब तक जमा नहीं हो सके, क्योंकि संबंधित मतदाता अपने पते पर नहीं मिले, स्थानांतरित हो चुके थे, मृत पाए गए या फिर डुप्लीकेट एंट्री थी।
इसके अलावा, लगभग 1.34 करोड़ फॉर्म में तर्कसंगत विसंगतियां पाई गई हैं, जिनमें माता-पिता के नाम में गलतियां, उम्र का असामान्य अंतर और अन्य तथ्यात्मक त्रुटियां शामिल हैं। करीब 30 लाख फॉर्म 2002 की सूची से मेल नहीं खा पाए, जबकि 85 लाख फॉर्म में नामों की असंगतियां दर्ज की गईं।

2 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई का अनुमान

सुब्रत गुप्ता के अनुसार, इन सभी मामलों को मिलाकर करीब 2 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई प्रक्रिया में शामिल करना पड़ सकता है, ताकि अंतिम मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और पारदर्शी हो।

अधिकारियों की कमी बड़ी बाधा

वर्तमान में राज्य में केवल 3,300 EROs और AEROs तैनात हैं। यदि 45 दिनों में सुनवाई पूरी करनी हो, तो एक अधिकारी को रोजाना करीब 140 मामलों की सुनवाई करनी पड़ेगी, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसी कारण आयोग से 2,500–3,000 अतिरिक्त अधिकारियों की मांग की गई है।

निष्पक्षता पर जोर

गुप्ता ने BLOs के काम की सराहना करते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नागरिक-केंद्रित और निष्पक्ष है। सुनवाई न्यायिक प्रकृति की होगी, इसलिए किसी भी मतदाता को मनमाने ढंग से मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। तकनीकी दिक्कतें, नोटिस वितरण और अनुपस्थित मतदाताओं के लिए नई तारीख तय करना भी आयोग के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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