Uranium poisoning in Delhi
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी के कई इलाकों के भूजल में सुरक्षित सीमा से अधिक यूरेनियम पाया गया है, जिससे न सिर्फ किडनी और हड्डियों, बल्कि दिमाग, तंत्रिका तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ बता रहे हैं।
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 103 भूजल नमूनों में से 13 नमूनों (लगभग 12.6%) में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से अधिक पाई गई। सबसे अधिक प्रभावित इलाके हैं: उत्तरी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र और नांगलोई-राजपुरा।
डॉ. हर्षल आर. सावले के अनुसार
एम्स के डॉ. हर्षल आर. सावले के अनुसार, यूरेनियम धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर न्यूरोटॉक्सिसिटी पैदा करता है। इसका असर दिमाग पर पड़ता है, जिससे याददाश्त कमजोर होती है, सीखने की क्षमता घटती है और तनाव, चिंता व अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ती हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा ज्यादा गंभीर है। लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी पीने से ब्रेन सेल्स की कार्यक्षमता धीमी पड़ सकती है और मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन, नींद में गड़बड़ी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ लीटर पानी की खपत होती है, जिसमें 10-13% भूजल का हिस्सा है। इस भूजल में यूरेनियम की अधिकता राजधानीवासियों के लिए अदृश्य लेकिन गंभीर खतरे का संकेत दे रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो इसके आगे चलकर इसके परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।

