Unnao rape case: कुलदीप सेंगर को मिली राहत पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

3 Min Read

Unnao rape case

नई दिल्ली,एजेंसियां। उन्नाव दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। सेंगर की जेल की सजा सस्पेंड किए जाने को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई है।

हाई कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल

यह याचिका अधिवक्ता अंजली पटेल और पूजा शिल्पकार द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा निलंबित करते समय निचली अदालत की उस अहम टिप्पणी को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कुलदीप सेंगर को जीवन भर जेल में रहना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि रेप जैसे जघन्य अपराध में दोषी पाए जाने और गंभीर आपराधिक इतिहास के बावजूद सजा सस्पेंड करना कानून और तथ्यों दोनों के खिलाफ है।

पीड़िता के परिवार पर दबाव का आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि हाई कोर्ट अभियोजन पक्ष द्वारा पेश ठोस सबूतों को समझने में विफल रहा। इन सबूतों से सेंगर की बर्बरता, राजनीतिक प्रभाव और आपराधिक प्रवृत्ति साफ झलकती है। याचिका के मुताबिक, पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत भी सेंगर द्वारा परिवार को डराने और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश का नतीजा थी।

23 दिसंबर को मिली थी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा को उसकी अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सेंगर पहले ही सात साल पांच महीने जेल में बिता चुका है। हालांकि, वह फिलहाल जेल में ही रहेगा, क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उसे 10 साल की सजा हुई है, जिसमें उसे जमानत नहीं मिली है।

सख्त शर्तों के साथ जमानत

हाई कोर्ट ने सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और तीन जमानतें जमा करने का आदेश दिया था। साथ ही, उसे पीड़िता के घर के पांच किलोमीटर के दायरे में जाने और पीड़िता या उसकी मां से संपर्क करने पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पीड़िता को CRPF की सुरक्षा मिलती रहेगी। अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम माना जा रहा है।

Share This Article