Alankar Agnihotri resignation
नई दिल्ली, एजेंसियां। UGC की नई गाइडलाइंस को लेकर जारी विवाद के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने UGC के नए नियमों की तुलना ब्रिटिश काल के कुख्यात रॉलेट एक्ट से करते हुए इसे ‘काला कानून’ करार दिया और पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा है कि आखिर रॉलेट एक्ट क्या था, जिसका नाम आज भी दमनकारी कानून के रूप में लिया जाता है।
रॉलेट एक्ट क्या है?
रॉलेट एक्ट मार्च 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किया गया था। इसे आधिकारिक तौर पर Anarchical and Revolutionary Crimes Act कहा गया, लेकिन यह रॉलेट कमेटी के अध्यक्ष सर सिडनी रॉलेट के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस कानून ने ब्रिटिश सरकार को असाधारण शक्तियां दे दी थीं। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी या क्रांतिकारी गतिविधियों के शक में बिना मुकदमा चलाए दो साल तक जेल में रखा जा सकता था। इतना ही नहीं, पुलिस को बिना वारंट तलाशी लेने, लोगों को हिरासत में लेने और नागरिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदी लगाने का अधिकार मिल गया था।
इस कानून का देशभर में तीखा विरोध हुआ। महात्मा गांधी ने इसे भारतीयों की नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया और इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत की। 30 मार्च और 6 अप्रैल 1919 को रॉलेट सत्याग्रह के तहत विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि, ब्रिटिश दमन और हिंसा के कारण हालात बिगड़ते चले गए।
इसी कानून के विरोध जलियांवाला बाग हुआ था
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में इसी कानून के विरोध के बीच ब्रिटिश सैनिकों ने निहत्थी भीड़ पर गोलियां चला दीं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। इस नरसंहार ने पूरे देश को झकझोर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।लगातार विरोध, हिंसा और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद आखिरकार अंग्रेजों को झुकना पड़ा और वर्ष 1922 में रॉलेट एक्ट को वापस ले लिया गया। आज अलंकार अग्निहोत्री द्वारा UGC नियमों की तुलना रॉलेट एक्ट से किए जाने के बाद यह ऐतिहासिक कानून एक बार फिर देश की बहस के केंद्र में आ गया है।











