Language controversy:
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र में हालिया भाषा विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जबरदस्ती भाषा थोपे जाने का वे विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, “हिंदी भाषी राज्यों में क्या तमिल, तेलगू या मराठी पढ़ाई जाएगी? प्रधानमंत्री गुजरात से हैं और हिंदी अच्छी बोलते हैं, तो क्या उन्हें बचपन से हिंदी पढ़ाई गई थी? जो जरूरत होती है, लोग वही भाषा सीखते हैं।” दरअसल, यह बयान महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले के बाद आया है जिसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने की कोशिश की गई थी, जिसे विरोध के बाद वापस ले लिया गया।
उद्धव ठाकरे ने अमेरिकी टैरिफ पर कहा
उद्धव ठाकरे ने अमेरिकी टैरिफ मुद्दे और पीएम मोदी के “किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा” वाले बयान पर भी तंज कसते हुए कहा कि जो किसान दिल्ली आना चाहते थे, उन्हें रोका गया, अब चुनावी माहौल में उन्हें किसान याद आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को रोकने के लिए कीलें, दीवारें लगाई गईं, अब सभी नेता खुद को किसान का बेटा बता रहे हैं।
भारत-चीन संबंधों पर कहा
उद्धव ने राज ठाकरे और भारत-चीन संबंधों को लेकर भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि जो पहले चीन को दुश्मन बता रहे थे, अब वहां क्यों जा रहे हैं, पाकिस्तान से मैच क्यों खेल रहे हैं? उन्होंने कहा कि अब देश को ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो कठिन समय में देश के साथ खड़ा हो। इंडिया गठबंधन पर बात करते हुए उद्धव ने कहा कि हम जानता है हमें क्या करना है, हम मिलकर आगे की रणनीति बनाएंगे।
इसे भी पढ़ें








