Udaipur Files:
नई दिल्ली, एजेंसियां। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट में ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि यह फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। मदनी ने फिल्म के कंटेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके माध्यम से मुस्लिमों को हिंसक, दंगे करने वाले और देश के खिलाफ षडयंत्र रचने वाले के रूप में दिखाया गया है।
फिल्म के कथानक और डायलॉग पर अरशद मदनी की कड़ी आपत्ति
अरशद मदनी ने कहा कि फिल्म की कहानी और डायलॉग्स का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को टारगेट करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में मुस्लिम किरदारों को पाकिस्तान के आतंकवादियों के लिए काम करने वाला और धोखेबाज बताया गया है। यह फिल्म न केवल उदयपुर के कन्हैया लाल के मर्डर से संबंधित नहीं है, बल्कि एक हेट स्पीच के रूप में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का प्रयास है।
फिल्म के निर्माता अमित जानी पर गंभीर आरोप
मदनी ने फिल्म के निर्माता अमित जानी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जानी एक सेल्फ-स्टाइल्ड एक्टिविस्ट हैं और उन्होंने 2012 में यूपी के पूर्व सीएम मायावती की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया, कश्मीरियों के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और कई नेताओं को धमकी दी। मदनी का कहना है कि यह फिल्म मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने का हिस्सा है, जिससे गैर-मुस्लिमों में मुस्लिमों के प्रति दुर्भावना पैदा हो सकती है।
केंद्र की समिति और CBFC की भूमिका पर सवाल उठाए
अरशद मदनी ने फिल्म के पुनरीक्षण के लिए गठित समिति पर भी सवाल उठाए, खासकर कुछ सदस्य जो भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र को इस समिति को फिल्म की जांच का जिम्मा नहीं देना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की टाली
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सभी सरकारों में ऐसे नियुक्तियां होती हैं और इसे चुनौती नहीं दी जा सकती। वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि सरकार हमेशा सलाहकार समिति रख सकती है और इस पर कोई गलत नहीं है। कोर्ट ने मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में भेजने की संभावना जताई।
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