Udaipur Files:
चेन्नई, एजेंसियां। तमिल फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज़ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की ओर से फिल्म की प्रदर्शनी पर रोक लगाने के लिए पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट ने फिलहाल फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाते हुए सेंसर बोर्ड को पुनर्विचार करने के निर्देश दिए थे। अब इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, मौलाना मदनी के वकीलों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष अपील दाखिल की है।
याचिका में कहा गया
याचिका में कहा गया है कि फिल्म समाज में सांप्रदायिक तनाव और नफरत फैलाने वाली है, जिससे भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इसमें दावा किया गया है कि फिल्म निर्माता अमित जानी का अतीत भड़काऊ गतिविधियों से जुड़ा रहा है और फिल्म में कई दृश्य काल्पनिक हैं, जिनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही नूपुर शर्मा विवाद को भी फिल्म में शामिल किया गया है, जिसके चलते पहले भी देश और विदेश में भारी विरोध हुआ था।
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दयार याचिका
फिल्म निर्माता ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया द्वारा दायर याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई की पुष्टि की है। उधर, मौलाना मदनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल दलील पेश करेंगे। याचिका में यह भी कहा गया है कि सेंसर बोर्ड द्वारा 55 दृश्य हटाने के बावजूद फिल्म का मूल स्वरूप नहीं बदला है और इसके प्रचार से हिंसा भड़क सकती है।सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार एक सप्ताह के भीतर याचिका पर निर्णय लेना है। तब तक फिल्म की रिलीज़ पर रोक जारी रहेगी।
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