UCC is strict in Uttarakhand:
देहरादून, एजेंसियां। उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) में अहम संशोधन करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह पंजीकरण से जुड़े नियमों को और सख्त बना दिया है। नए संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा होते हुए भी किसी को धोखे में रखकर लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे अधिकतम 7 साल की सजा और जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
क्या है UCC की धारा 380(2) में ?
यह प्रावधान UCC की धारा 380(2) में जोड़ा गया है, जो उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगा जिन्होंने लिव-इन संबंध समाप्त कर दिया हो या जिनके साथी का 7 वर्ष से कोई अता-पता न हो। वहीं, यदि कोई व्यक्ति बल, दबाव या धोखाधड़ी से सहमति प्राप्त कर किसी के साथ सहवास करता है, तो उसे भी 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है, जो UCC की धारा 387 में संशोधन के बाद जोड़ा गया है।
इसके अलावा विवाह पंजीकरण की समयसीमा को 6 महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष कर दिया गया है और देरी पर जुर्माना वसूलने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। साथ ही, पंजीकरण निरस्त करने का अधिकार रजिस्ट्रार जनरल को दिया गया है (धारा 390-क) और जुर्माना वसूली भू-राजस्व बकाया की तर्ज पर की जाएगी (धारा 390-ख)। राज्य सरकार ने इस संशोधन अधिनियम को विधानसभा में पेश कर दिया है, जो बुधवार को पारित होने की संभावना है।
कई तकनीकी और व्यावहारिक त्रुटियों में सुधार
साथ ही, अधिनियम में कई तकनीकी और व्यावहारिक त्रुटियों को भी सुधारा गया है, जैसे कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) से प्रतिस्थापित करना और “फीस” की जगह “पेनल्टी” शब्द का प्रयोग सुनिश्चित करना। इन संशोधनों के ज़रिए सरकार रिश्तों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।
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