Trump tariff U-turn:
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर लगाए गए कठोर टैरिफ से अचानक पीछे हटते हुए कई आवश्यक उपभोग वस्तुओं—जैसे बीफ, कॉफी, चाय, ट्रॉपिकल फल, कोको, मसाले और उर्वरकों से शुल्क हटाने का फैसला किया है। शुक्रवार को की गई इस घोषणा ने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीति में एक बड़ा मोड़ ला दिया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब उपभोक्ता मूल्यों में लगातार वृद्धि से अमेरिकी प्रशासन पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है और हालिया ऑफ-ईयर चुनावों में डेमोक्रेट्स की मजबूती ट्रंप की नीतियों को लेकर जन असंतोष को दर्शाती है।
क्यों किया ट्रंप ने फैसला वापस?
ट्रंप की टैरिफ नीति का लक्ष्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना था, लेकिन बीफ जैसी बुनियादी वस्तुओं की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों और भारी महंगाई ने उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा असर डाला। डेमोक्रेट्स ने कहा कि ट्रंप ने अंततः स्वीकार किया कि उनके लगाए शुल्क अमेरिकी परिवारों पर महंगा बोझ बन गए थे। विशेष रूप से वर्जीनिया और न्यू जर्सी में चुनावी हार ने व्हाइट हाउस को नीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर किया।
क्या बोले ट्रंप?
एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हमने कॉफी जैसी कुछ वस्तुओं पर थोड़ा रिवर्स किया है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मामलों में टैरिफ का प्रभाव उपभोक्ता कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इसे “ज्यादातर अन्य देशों” ने वहन किया है।
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि नए व्यापार समझौतों जैसे इक्वाडोर, अर्जेंटीना, एल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला के साथ हुए समझौते—के बाद इन शुल्कों की अब जरूरत नहीं रही।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया:
फूड इंडस्ट्री एसोसिएशन ने ट्रंप के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि खाद्य आयात पर शुल्क हटाने से अमेरिकी बाजार में पर्याप्त आपूर्ति और किफायती कीमतें सुनिश्चित होंगी।
टैरिफ राजस्व का उपयोग कहाँ होगा?
ट्रंप ने संकेत दिया कि शुल्कों से मिले राजस्व का उपयोग राष्ट्रीय ऋण कम करने और अधिकांश अमेरिकियों को 2,000 डॉलर के प्रत्यक्ष भुगतान देने में किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह कमाए हुए पैसे हैं, बनाए हुए नहीं…यह धन अन्य देशों से आता है।”चुनावों में झटकों और बढ़ती महंगाई के बीच ट्रंप का यह कदम उनकी आर्थिक नीतियों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।



