Jitiya Vrat 2025:
नई दिल्ली, एजेंसियां। जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखती हैं। इस वर्ष यह व्रत 14 सितंबर 2025 को रखा जाएगा और इसका पारण 15 सितंबर को किया जाएगा। यह व्रत निर्जला उपवास का होता है, जिसमें व्रती महिलाएं पूरे दिन बिना जल के रहकर संतान की कुशलता की कामना करती हैं।
आधी रात को दही-चूड़ा खाने की परंपरा क्यों?
जितिया व्रत की शुरुआत से पहले सप्तमी की अर्धरात्रि को दही-चूड़ा खाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं।
• पौष्टिकता और ऊर्जा: चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जिससे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है।
• शरीर को ठंडक: दही का सेवन शरीर को ठंडा रखता है और इसमें मौजूद जलांश लंबे समय तक भूख-प्यास कम करता है।
• मौसम और व्यावहारिकता: यह व्रत भाद्रपद/आश्विन माह में आता है, जब धान की कटाई का समय होता है और चावल, चूड़ा जैसे अनाज आसानी से उपलब्ध होते हैं।
नहाय-खाय और पारण की विशेषता
व्रत से एक दिन पहले ‘नहाय-खाय’ की परंपरा होती है, जिसमें चावल, दाल, कद्दू-झींगा जैसी सब्जियां और देसी घी का भोजन किया जाता है। व्रत के दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और जीमूतवाहन व चील-सियारिन की पूजा कर कथा सुनती हैं। नवमी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है। उस दिन पूड़ी, कचौड़ी, दाल-भात, कद्दू-झींगा, नोनिया का साग, ठेकुआ और खीर जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।
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