Toxic cough syrup death: जहरीले कफ सिरप ने ली एक और मासूम की जान, फेल हो गई थीं दोनों किडनियां

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Toxic cough syrup death

नागपुर, एजेंसियां। जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप से जुड़ा मामला दिन-ब-दिन और गंभीर होता जा रहा है। एक और मामला बैतूल जिले से सामने आ रहा है जहां चार वर्षीय हर्ष यदुवंशी ने 120 दिन तक चले इलाज के बाद नागपुर स्थित एम्स में दम तोड़ दिया। हर्ष की मौत के साथ ही इस कफ सिरप से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ गई है, जबकि मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

गांव पहुंचते ही मातम में बदला माहौल

सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब हर्ष का शव उसके गांव टीकाबरी (बोरदेही) पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीणों में जिम्मेदारों के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

सर्दी-जुकाम से शुरू हुआ दर्दनाक सफर

परिजनों के अनुसार सितंबर 2025 में हर्ष को सर्दी-जुकाम और बुखार हुआ था। 26 सितंबर को छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक से उसका इलाज कराया गया, जहां उसे कोल्ड्रिफ कफ सिरप दिया गया। आरोप है कि दवा लेने के बाद बच्चे की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उल्टी, कमजोरी और पेशाब में परेशानी के बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल और फिर बड़े मेडिकल सेंटर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं। 120 दिन तक डायलिसिस और गहन इलाज के बावजूद हर्ष की जान नहीं बचाई जा सकी।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

हर्ष के चाचा श्याम देवा यदुवंशी ने पहले ही प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आशंका जताई थी कि किडनी फेल होने की वजह संदिग्ध कफ सिरप हो सकता है। 22 नवंबर 2025 को एसडीओपी के निर्देश पर यह शिकायत पुलिस केस डायरी में शामिल की गई। केस डायरी में श्रीसन फार्मा निर्मित कोल्ड्रिफ सिरप की जब्त बोतल का भी उल्लेख है।

9 गिरफ्तारियां, लेकिन निजी क्लीनिक पर कार्रवाई नहीं

अब तक इस मामले में दवा कंपनी, केमिकल सप्लायर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और मेडिकल स्टोर संचालकों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, परासिया के उस निजी क्लीनिक पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से परिजन और ग्रामीण नाराज हैं। पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि केस डायरी में डॉक्टरों के नाम दर्ज होने के बावजूद न तो क्लीनिक सील किया गया और न ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई।

परिजनों की मांग

हर्ष की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने सरकार से आर्थिक सहायता, निष्पक्ष जांच और दवा निर्माण से लेकर इलाज तक जुड़े सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

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