AI social media:
नई दिल्ली, एजेंसियां। डिजिटल युग में एआई और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल लोगों की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर शिरी मेलुमैड ने 250 प्रतिभागियों पर एक प्रयोग किया। इसमें कुछ प्रतिभागियों को Google सर्च इस्तेमाल करने की अनुमति थी और कुछ को केवल AI-जनित सामग्री के माध्यम से सलाह लिखनी थी। परिणाम चौंकाने वाले थे। AI का इस्तेमाल करने वालों ने बहुत साधारण और उथली सलाह दी, जबकि Google सर्च करने वालों ने गहराई से सोचकर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को संतुलित रखते हुए सुझाव दिए।
न्यूयॉर्क टाइम्स और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार:
‘ब्रेन रॉट’ शब्द डिजिटल युग की वास्तविकता बन गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, TikTok, Instagram जैसी प्लेटफॉर्म्स छोटे, बिना सोच-विचार वाले कंटेंट के कारण दिमाग को सुन्न कर रही हैं। अमेरिका में हुई स्टडीज में पाया गया कि जो बच्चे रोजाना तीन घंटे से अधिक सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, उनकी मेमोरी, रीडिंग और शब्दावली में गिरावट आई है।
MIT की रिसर्च में पाया गया कि ChatGPT का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का ब्रेन एक्टिविटी स्तर सबसे कम था। 83% छात्र अपने निबंध से एक भी वाक्य याद नहीं रख सके। वहीं, जिन्होंने खुद लिखा या Google सर्च किया, वे अपनी रचनाओं को याद रख सके।
विशेषज्ञों का मानना है:
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का संतुलित इस्तेमाल जरूरी है। बच्चों के लिए स्क्रीन-फ्री ज़ोन बनाएं, सोशल मीडिया का समय सीमित करें और AI को सहायक उपकरण की तरह इस्तेमाल करें। मेलुमैड के अनुसार, पहले खुद सोचें और लिखें, फिर AI की मदद लें।
अगर तकनीक का समझदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो ये दिमाग को रॉट नहीं बल्कि रिच बना सकती है। संतुलन और सक्रिय सोच ही डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता को बनाए रखने की कुंजी है।
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