Maharani 4:
मुंबई, एजेंसियां। सोनी लिव पर लौटी हुमा कुरैशी की ‘महारानी सीजन 4’ एक बार फिर बिहार की राजनीति को केंद्र में रखती है, लेकिन इस बार दांव और भी बड़ा है। सीरीज में रानी भारती (हुमा कुरैशी) मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर दिल्ली की सत्ता की ओर कदम बढ़ाती है। कहानी अब बिहार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति और प्रधानमंत्री पद की कुर्सी तक पहुंचती है।
कहानी की शुरुआत
कहानी की शुरुआत दिल्ली की गलियों से होती है, जहां प्रधानमंत्री सुधाकर श्रीनिवास जोशी (विपिन शर्मा) की सत्ता डगमगा रही है। वह क्षेत्रीय नेताओं का समर्थन पाने की कोशिश करता है, जिसमें रानी भारती भी शामिल हैं। जोशी के अहंकार और अपमानजनक व्यवहार के बाद रानी प्रधानमंत्री बनने की ठान लेती है। वह मुख्यमंत्री पद छोड़ अपनी बेटी रोशनी (श्वेता प्रसाद बासु) को उत्तराधिकारी बनाती है, लेकिन यह कदम उसके बेटे जयप्रकाश (शार्दुल भारद्वाज) और पार्टी में असंतोष पैदा करता है।
राजनीति, परिवार और प्रतिशोध का मेल
निर्देशक पुनीत प्रकाश ने सुभाष कपूर और नंदन सिंह की लिखी कहानी में सत्ता की लालच, परिवारवाद, एजेंसियों के दुरुपयोग और राजनीतिक सौदेबाजी जैसे तत्वों को बारीकी से जोड़ा है। यह सीजन राजनीतिक थ्रिलर के साथ-साथ एक भावनात्मक पारिवारिक ड्रामा भी बन जाता है।हुमा कुरैशी ने एक बार फिर रानी भारती के रूप में अपनी सशक्त अभिनय क्षमता से सीरीज को संभाला है। श्वेता प्रसाद बासु और शार्दुल भारद्वाज ने भी दमदार प्रदर्शन किया है। विपिन शर्मा का प्रधानमंत्री जोशी के रूप में कुटिल अभिनय याद रह जाता है।
‘महारानी सीजन 4’
‘महारानी सीजन 4’ सत्ता, महत्वाकांक्षा और न्याय की जंग को बड़े स्तर पर ले जाती है। राजनीति और इमोशन का यह मिश्रण दर्शकों को बांधे रखता है। अंत में पांचवें सीजन की झलक यह संकेत देती है कि रानी भारती की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है
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