Kajal on Saturday:
नई दिल्ली, एजेंसियां। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव को कर्म और न्याय का देवता माना गया है। उनकी कृपा से जीवन में स्थिरता और तरक्की आती है, जबकि अशुभ प्रभाव से संघर्ष और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। शास्त्रों में काजल को शनि को प्रसन्न करने का सरल उपाय बताया गया है।
काजल का ज्योतिषीय महत्व
काजल (सूरमा/कोहल) केवल सौंदर्य का साधन नहीं, बल्कि शनि ग्रह से जुड़ा उपाय है। काला रंग शनि को प्रिय है और काजल लगाने से शनि दोष व साढ़ेसाती का असर कम माना जाता है। राहु-केतु और चंद्रमा से भी काजल का संबंध जोड़ा गया है, जिससे नजर दोष और मानसिक अशांति से राहत मिलती है।
प्राचीन ग्रंथों में काजल
• अथर्ववेद: नेत्र रोगों से बचाव का उल्लेख।
• चरक संहिता व सुश्रुत संहिता: आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार।
• गरुड़ पुराण: नजर दोष और शनि प्रकोप से मुक्ति।
• लाल किताब: नौकरी और व्यापार में रुकावटें दूर करने के लिए काजल दान का महत्व।
शनिदेव और काजल का उपाय
शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर, चांदी या स्टील की डिब्बी में रखा काजल अर्पित करें। साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे शनि दोष, नजर दोष और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
काजल से मिलने वाले लाभ
• शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
• नौकरी और व्यापार में रुकावटें दूर होती हैं।
• नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव।
• आत्मविश्वास और मानसिक शांति बढ़ती है।
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