Supreme Court acid attack cases: एसिड अटैक केसों की लंबित सुनवाई पर SC सख्त, बोले – “अपराधों में सिर्फ सजा ही नहीं, पीड़ितों को समय पर पर्याप्त मुआवजा भी देना है जरूरी “

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Supreme Court acid attack cases:

हैदराबाद, एजेंसियां। देशभर में एसिड अटैक के मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में सिर्फ सजा ही नहीं, बल्कि पीड़ितों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा दिलाना भी उतना ही जरूरी है। कोर्ट ने यहां तक सुझाव दिया कि पीड़ित की मदद के लिए आरोपी की संपत्ति जब्त या नीलाम करने जैसे कठोर कदमों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

यह टिप्पणी एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एसिड अटैक से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले तय की गई गाइडलाइंस को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि देश के कई राज्यों में सैकड़ों मामले अब भी लंबित हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में 198, गुजरात में 114, बिहार में 68, पश्चिम बंगाल में 60 और महाराष्ट्र में 58 केस पेंडिंग हैं।

पीड़ितों के अधिकारों पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया और कमजोर विवेचना के कारण आरोपी अक्सर बच निकलते हैं, जिससे पीड़ितों को दोहरी पीड़ा झेलनी पड़ती है। बेंच ने केंद्र सरकार को संकेत दिया कि एसिड अटैक जैसे अपराधों के लिए और कठोर दंड सुनिश्चित करने के लिए विधायी हस्तक्षेप की जरूरत पड़ सकती है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि मुआवजा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि पीड़ितों तक समय पर पहुंचे।

कानून और चुनौतियां

भारतीय न्याय संहिता के तहत एसिड अटैक एक गंभीर अपराध है, जिसमें न्यूनतम 10 साल की सजा और आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इसके बावजूद कमजोर जांच, कानून के ढीले पालन और सामाजिक दबाव के चलते न्याय में देरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि पीड़ित-केंद्रित न्याय, त्वरित ट्रायल और कड़े कदम ही एसिड हमलों पर प्रभावी रोक लगा सकते हैं।

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