Firecrackers ban:
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। हालांकि कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इस दीवाली ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की शर्तों के साथ अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को सुझाव दिया कि केवल NEERI और PESO प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स को ही बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी जाए।
दिल्ली सरकार ने यह भी सुझाव
दिल्ली सरकार ने यह भी सुझाव दिया कि लड़ी वाले पटाखों पर पाबंदी जारी रहे और ग्रीन पटाखों को दीपावली, गुरुपर्व और क्रिसमस के अवसर पर जलाने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही, पटाखों के जलाने का समय रात 8 बजे से 10 बजे तक तय करने का प्रस्ताव रखा गया। तुषार मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि बच्चों को मनाने में अक्सर माता-पिता का समय लगता है, इसलिए त्योहार के दौरान समय सीमा की सख्ती नहीं रखी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाया सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पटाखों पर बैन के बावजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार हुआ है। तुषार मेहता ने जवाब दिया कि AQI अधिकतर पहले जैसा ही है, केवल कोविड के दौरान वायु गुणवत्ता बेहतर हुई थी। कुछ वकीलों ने यह भी कहा कि पराली जलाना और वाहन प्रदूषण जैसी समस्याओं पर ध्यान न देकर केवल पटाखों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
पटाखा उत्पादकों के वकील ने बताया
पटाखा उत्पादकों के वकील ने बताया कि 2017 में केवल ग्रीन क्रैकर्स की अनुमति थी, लेकिन बाद में पूरी तरह से रोक लगा दी गई। अब केवल 49 प्रमाणित उत्पादकों को ही ग्रीन पटाखों का निर्माण और बिक्री करने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने इस सुझाव पर गौर किया, ताकि त्योहार के अवसर पर बच्चों को भी खुश होने का मौका मिल सके।
इस फैसले से लगता है कि इस बार दीवाली पर ग्रीन पटाखों के साथ कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन लड़ी वाले पटाखों पर पाबंदी जारी रहेगी।
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