Supreme Court on stray dogs: आवारा कुत्तों के आतंक पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, नगर निकायों के साथ डॉग फीडर्स की भूमिका पर उठाए सवाल

Juli Gupta
3 Min Read

Supreme Court on stray dogs:

नई दिल्ली, एजेंसियां। आवारा कुत्तों के हमलों के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी हमले में किसी व्यक्ति को गंभीर चोट आती है या उसकी मौत होती है, तो केवल नगर निकाय ही नहीं, बल्कि डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट कहा कि उसकी पिछली टिप्पणियों को मजाक या व्यंग्य समझना गलत होगा, अदालत इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

पीठ ने कहा

पीठ ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है और कोर्ट जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगी। अदालत ने संकेत दिया कि निजी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को दोपहर 2 बजे होगी, जिसमें एमिकस क्यूरी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के वकील और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की दलीलें सुनी जाएंगी।

कोर्ट में तीखी बहस, दोनों पक्षों की दलीलें

सुनवाई के दौरान पीड़ितों की ओर से कहा गया कि आवारा कुत्तों के हमलों से खासकर बच्चों और आम नागरिकों की जान खतरे में है और प्रशासन समय पर प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रहा है। कुछ वकीलों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसी मौतों के लिए राज्य सरकार मुआवजे की जिम्मेदार होनी चाहिए।

वहीं, डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने तर्क दिया कि समस्या का समाधान कुत्तों को मारना नहीं, बल्कि प्रभावी नसबंदी, टीकाकरण और कचरा प्रबंधन है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी जीवों के प्रति करुणा का संदेश देता है और वैज्ञानिक तरीकों से ही इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

रेबीज और इलाज पर भी चिंता

सुनवाई के दौरान रेबीज की रोकथाम और इलाज को लेकर भी सवाल उठे। अदालत ने माना कि रेबीज पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है, लेकिन भारत में प्रभावी नीति की कमी है। कोर्ट ने दोहराया कि वह संतुलन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत के साथ इस संवेदनशील मुद्दे पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगी।

Share This Article