Sleeper bus fire rules
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्लीपर कोच बसों में लगातार सामने आ रही आग लगने की भयावह घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त सुविधाएं ही कर सकेंगी। इस निर्णय का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानकों से समझौता करने वाले गैर-मान्यता प्राप्त बॉडी बिल्डरों पर रोक लगाना है।
इन सुरक्षा फीचर्स को करना होगा अनिवार्य
नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि देशभर में पहले से चल रही स्लीपर कोच बसों में भी जरूरी सुरक्षा फीचर्स लगाना अनिवार्य होगा। इनमें आग लगने का तुरंत पता लगाने वाला फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग, ड्राइवर की नींद आने की चेतावनी देने वाला इंडिकेटर शामिल हैं। इसके अलावा, हर बस में इमरजेंसी एग्जिट और आपात स्थिति में शीशा तोड़ने के लिए हथौड़े भी अनिवार्य किए गए हैं।
AIS-052 कोड का पालन जरूरी
सरकार ने स्लीपर कोच बसों के लिए AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन अनिवार्य कर दिया है। यह एक राष्ट्रीय मानक है, जिसमें बस की संरचना, डिजाइन और सुरक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देश शामिल हैं। इस कोड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बसें दुर्घटना या आग की स्थिति में यात्रियों को अधिकतम सुरक्षा प्रदान कर सकें।
आग की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पिछले छह महीनों में स्लीपर बसों से जुड़ी आग की कम से कम छह बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें करीब 145 लोगों की मौत हुई। जांच में कई बार इमरजेंसी खिड़कियों की अनुपस्थिति, फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी और स्टाफ के अपर्याप्त प्रशिक्षण जैसी गंभीर खामियां पाई गईं।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगा कैशलेस इलाज
नितिन गडकरी ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट योजना शुरू करेंगे। इसके तहत दुर्घटना के बाद सात दिनों तक प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। साथ ही, घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिकों को नकद इनाम देने की भी व्यवस्था की जाएगी।

