Maha Shivratri puja:
नई दिल्ली, एजेंसियां। महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन देशभर में शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, व्रत और रात्रि जागरण का आयोजन होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, लेकिन कुछ नियमों की अनदेखी करने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर निशीथ काल की पूजा का विशेष महत्व होता है।इस सा निशीथ काल 15 फरवरी की रात 11:52 बजे से 16 फरवरी को 12:42 बजे तक रहेगा। इस समय में की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय भक्तों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। जल अर्पित करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े होना चाहिए और जल इस प्रकार चढ़ाएं कि वह उत्तर दिशा से शिवलिंग पर गिरे। जल चढ़ाने के तुरंत बाद परिक्रमा करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।
पूजा में किन बातों से बचें
महाशिवरात्रि की पूजा में कांसे के बर्तन का प्रयोग अशुभ माना जाता है। दूध या जल अर्पित करने के लिए सोना, चांदी या तांबे के बर्तन का उपयोग करना श्रेष्ठ होता है। इसके अलावा, इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। सफेद, पीले, आसमानी या हल्के रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।यदि कोई भक्त व्रत नहीं रख पा रहा है, तब भी उसे तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान अनाज की जगह फलाहार करना उत्तम माना जाता है।
शिव को क्या न चढ़ाएं
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को तुलसी के पत्ते, तिल, टूटे हुए चावल और नारियल का पानी अर्पित करना वर्जित बताया गया है। वहीं, बिल्वपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है, लेकिन ध्यान रहे कि बिल्वपत्र तीनों पत्तों वाला और पूर्ण होना चाहिए।मान्यता है कि इस दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहकर की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी नियम को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।












