पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण

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पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण

पंडित प्रदीप मिश्रा एक अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक हैं। कहा जाता है कि उनके एक कार्यक्रम के आयोजन में करीब एक करोड़ रुपये का खर्च आता है।

पंडित प्रदीप मिश्रा

उनका जन्म वर्ष 1980 में सीहोर में हुआ। इनका उपनाम रघु है और उन्होंने ग्रेजुएशन तक की शिक्षा हासिल की है।

उनके पिता ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और वे पहले चने का ठेला लगाते थे। बाद में वे चाय की दुकान चलाने लगे।

पंडित प्रदीप मिश्रा को बचपन से ही भजन से था लगाव

प्रदीप मिश्रा भी उनके काम में उनका हाथ बंटाते थे। पंडित प्रदीप मिश्रा को बचपन से ही भजन में रूचि थी और वे भक्ति गीत गाया करते थे।

वे थोड़े बड़े हुए तो सीहोर में ही एक ब्राह्मण परिवार की गीता बाई पराशर नाम की महिला ने उन्हें कथा वाचक बनने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद गुरूजी की दीक्षा लेकर पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव पुराण का कथा वाचन शुरू कर दिया।

सीहोर में ही उन्होंने मंच पर कथा वाचक के रूप में अपनी शुरूआत की और लोकप्रिय होते गए।

अपनी कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा कहते हैं, एक लोटा जल समस्याओं का हल। यह बात लोगों के जेहन में बैठ गयी और शिवजी की कृपा से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्हें सीहोर वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है। पंडित प्रदीप मिश्रा की सबसे रोचक बात ये है कि वे अपने प्रवचनों में शिव महापुराण की कथा सबसे ज्यादा करते हैं।

पंडित प्रदीप मिश्रा के हैं लाखों फॉलोअर्स

उनके यूट्यूब और फेसबुक पर लाखों की संख्या में फॉलोअर्स हैं। वे अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा दान में दे देते हैं जिससे गरीब-दुखियों का भला होता है।

वे जहां भी जाते हैं उनकी कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

कथा के साथ वे जीवन को सुखी बनाने के भी छोटे-छोटे उपाय बताते हैं। उनकी ख्याति एक सेलिब्रेटी प्रवचनकार के रूप में भी है।

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