Shankaracharya Avimukteshwaranand:
नई दिल्ली, एजेंसियां। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन नियमों को हिंदू धर्म और समाज के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा कि “कोई जाति अन्यायी नहीं होती, अन्याय व्यक्ति करता है”, लेकिन UGC के नए नियम जातियों के बीच अनावश्यक विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं।
‘हर जाति में सज्जन और दुर्जन होते हैं’
शंकराचार्य ने कहा कि समाज में हर जाति के भीतर अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के लोग होते हैं। किसी एक जाति को अन्यायी ठहराना न केवल गलत है, बल्कि यह सामाजिक समरसता को भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों के जरिए एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, जो बेहद अविवेकपूर्ण कदम है।
हिंदू धर्म को होगी क्षति: शंकराचार्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ये नियम लागू रहे, तो इससे हिंदू धर्म और सामाजिक एकता को गंभीर क्षति पहुंचेगी। उन्होंने केंद्र सरकार और UGC से अपील की कि इस कानून को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि समाज में बढ़ते तनाव को रोका जा सके।
क्या हैं UGC के नए नियम
UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में समानता रेगुलेशन, 2026’ अधिसूचित किए हैं। इन नियमों के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने, शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र को अनिवार्य किया गया है। हालांकि, इन नियमों को लेकर कई वर्गों में असंतोष देखा जा रहा है।
प्रशासनिक विवाद भी आया सामने
UGC नियमों के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे और बाद की कार्रवाई ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है। शंकराचार्य को स्नान से रोके जाने के बाद यह मामला धार्मिक और राजनीतिक रंग भी ले चुका है।











