Serotonin vs Cortisol
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुख और सुख दोनों ही मनुष्य के हिस्से है। कभी छोटी-सी बात पर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो कभी बिना किसी खास वजह के मन उदास हो जाता है। यह बदलाव सिर्फ परिस्थितियों का नतीजा नहीं, बल्कि हमारे दिमाग में सक्रिय होने वाले हार्मोन्स का खेल है। मेडिकल शोध बताते हैं कि खुशी और गम का सीधा संबंध न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोन्स से होता है, जो हमारे मूड और व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
क्या होते खुशी महसूस कराने वाले हार्मोन्स?
अब बताते है खुशी महसूस कराने वाले प्रमुख हार्मोन्स क्या होते है? डोपामिन, सेरोटोनिन और एंडॉर्फिन शामिल हैं। डोपामिन को “रिवॉर्ड हार्मोन” कहा जाता है। जब हम कोई लक्ष्य हासिल करते हैं, तारीफ पाते हैं या पसंदीदा काम करते हैं, तब यह रिलीज होता है और हमें संतोष व उत्साह का एहसास कराता है। इसका असंतुलन होने पर सफलता के बावजूद खुशी महसूस नहीं होती।
सेरोटोनिन हमारे मूड को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसका स्तर सही रहने पर व्यक्ति शांत, आत्मविश्वासी और भावनात्मक रूप से संतुलित रहता है। धूप में समय बिताना, योग, ध्यान और नियमित दिनचर्या से सेरोटोनिन बढ़ता है। वहीं एंडॉर्फिन व्यायाम, हंसी और संगीत के दौरान रिलीज होता है, जो तनाव कम कर खुशी की अनुभूति कराता है।
दुख और तनाव के पीछे काहै क्या कारण?
दूसरी ओर, दुख और तनाव के पीछे कोर्टिसोल नामक हार्मोन प्रमुख कारण माना जाता है। इसे “स्ट्रेस हार्मोन” कहा जाता है। लंबे समय तक काम का दबाव, नींद की कमी, अकेलापन या चिंता कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ा देते हैं। इससे चिड़चिड़ापन, थकान और उदासी बढ़ती है। शोध बताते हैं कि डिप्रेशन में डोपामिन और सेरोटोनिन का स्तर घट जाता है, जिससे व्यक्ति को किसी भी चीज में आनंद नहीं मिलता।
विशेषज्ञों के अनुसार
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, सामाजिक जुड़ाव और तनाव प्रबंधन से हार्मोन्स का संतुलन बेहतर किया जा सकता है। यानी कभी खुशी और कभी गम का अनुभव हमारे शरीर की जैविक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे स्वस्थ जीवनशैली से काफी हद तक संतुलित रखा जा सकता है।








