Supreme Court
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में ED (एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट) अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह एफआईआर राजनीतिक रणनीति संस्था I-PAC और उसके निदेशक प्रतीक जैन के कार्यालय पर ED की छापेमारी को लेकर दर्ज की गई थी। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि इस एफआईआर के आधार पर फिलहाल ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
क्या है मामला?
मामला तब सामने आया जब पश्चिम बंगाल पुलिस ने आरोप लगाया कि ED की टीम ने I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के परिसरों में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर छापेमारी की और नियमों का उल्लंघन किया। इसके बाद राज्य पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। ED ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि छापेमारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी और केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर उनके काम में बाधा डालने की कोशिश है।
राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि केंद्रीय एजेंसी को भी कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ED अधिकारियों को राहत देते हुए इस एफआईआर पर रोक लगा दी है और अगली सुनवाई तक किसी भी जबरन कार्रवाई को अस्थगित कर दिया है।
विशेषज्ञों का क्या है कहना?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से ममता सरकार को झटका लगा है, क्योंकि राज्य पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपना रुख दिखाया था। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर हैं, जहां कोर्ट पूरे मामले की गहन समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि क्या ED अधिकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है या नहीं।
इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच अधिकार क्षेत्र और कानूनी प्रक्रियाओं के मुद्दों पर संवेदनशील रुख अपनाता है।








