WhatsApp privacy issue
नई दिल्ली, एजेन्सियां। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta और WhatsApp को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों को याद दिलाया कि उन्हें यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
Telegram CEO ने शेयर की Zuckerberg की पुरानी चैट
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के तुरंत बाद Telegram के CEO पावेल दुरोव ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर मार्क जुकरबर्ग की 2004 की एक पुरानी चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। यह चैट उस समय की बताई जा रही है जब जुकरबर्ग हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे और Facebook की शुरुआत कर रहे थे। स्क्रीनशॉट में दिखाया गया है कि जुकरबर्ग कथित तौर पर छात्रों से ईमेल, फोटो, एड्रेस और सोशल सिक्योरिटी नंबर जैसी निजी जानकारी जुटाने को लेकर मजाक करते नजर आए।
Meta पर डेटा सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
पावेल दुरोव ने इस चैट को शेयर करते हुए Meta की आलोचना की और कहा कि पहले सीमित लोगों का डेटा इकट्ठा किया जाता था, लेकिन अब अरबों लोगों का डेटा प्लेटफॉर्म्स के पास है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यूजर्स को WhatsApp के प्राइवेसी दावों पर पूरी तरह भरोसा करना चाहिए। दुरोव का कहना है कि WhatsApp एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का दावा करता है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि Meta यूजर्स की अन्य जानकारी जैसे बातचीत की आवृत्ति और संपर्कों से जुड़ा डेटा अब भी एकत्र कर सकता है।
यूजर्स के लिए बढ़ी सावधानी की जरूरत
इस पूरे विवाद के बाद डिजिटल सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यूजर्स को किसी भी सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही, सरकार और टेक कंपनियों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम और पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।










