Vijay Rally stampede case:
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु के करूर में अभिनेता और टीवीके पार्टी के संस्थापक विजय की राजनीतिक रैली के दौरान हुए भगदड़ मामले में 41 लोगों की मौत और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता उमा आनंदन की ओर से सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 10 अक्टूबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
मुख्य न्यायाधीश की बेंच
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस याचिका पर गौर किया। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि मद्रास हाई कोर्ट ने पहले सीबीआई जांच की मांग खारिज कर दी थी, जबकि एकल न्यायाधीश ने भगदड़ की जांच से संतुष्टि व्यक्त नहीं की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह लिस्ट करने का निर्देश दिया।
मद्रास हाई कोर्ट ने पहले 3 अक्टूबर को इस घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। SIT के नेतृत्व में भारतीय पुलिस सेवा की सीनियर अधिकारी असरा गर्ग हैं। हाई कोर्ट ने रैली के आयोजकों, टीवीके नेतृत्व और पुलिस की भूमिका की आलोचना भी की थी। पुलिस ने रैली में लगभग 27 हजार लोगों के शामिल होने और विजय के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में 7 घंटे की देरी को भगदड़ की मुख्य वजह बताया।
राजनीतिक और सामाजिक
करूर भगदड़ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक आलोचना जारी है। एमएनएम प्रमुख कमल हासन ने घटनास्थल का दौरा किया और इसे एक त्रासदी करार दिया। उन्होंने कहा कि सभी की जिम्मेदारी है, विशेष रूप से आयोजकों की। हासन ने माफी मांगने और गलती स्वीकार करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि किसी और को दोष नहीं देना चाहिए।
इस सुनवाई से तय होगा कि क्या इस मामले में सीबीआई जांच होगी या हाई कोर्ट के SIT के जरिए ही जांच पूरी की जाएगी। यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है और पूरे तमिलनाडु में इसकी संवेदनशीलता बनी हुई है।
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