S. Jaishankar: भारत-रूस संबंधों पर S. Jaishankar का बड़ा बयान: ‘किसी देश को हमारे रिश्तों पर वीटो का हक नहीं’

Anjali Kumari
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S. Jaishankar:

नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा बयान जारी किया है। मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों क्या अमेरिका इससे नाराज़ है, क्या यूरोपीय देशों की उठी है? का जयशंकर ने सीधा और बेबाक जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने वैश्विक साझेदारों को खुद चुनता है और किसी भी देश को इस पर वीटो का अधिकार नहीं है।

‘भारत-रूस संबंध दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक’:

एनडीटीवी को दिए बयान में जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध पिछले 70–80 वर्षों में बड़े उतार-चढ़ावों के बावजूद बेहद स्थिर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में जियोपॉलिटिकल बदलाव आते रहे रूस के चीन और यूरोप के साथ संबंध बदलते रहे, भारत के अन्य देशों के साथ भी उतार-चढ़ाव आए लेकिन भारत-रूस साझेदारी हमेशा मजबूत बनी रही। जयशंकर ने कहा कि रूस के साथ भारत का संबंध रणनीतिक और लंबे समय का है, जिसका अपना ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक महत्व है। यह रिश्ता किसी तीसरे देश की अनुमति पर आधारित नहीं है।

‘किसी देश के पास हमारे रिश्तों पर वीटो नहीं’:

पुतिन की यात्रा को लेकर पश्चिमी चिंताओं पर सवाल पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा,“किसी भी देश के पास यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे भारत किन देशों से संबंध रखे। यह बिल्कुल गलत अपेक्षा है।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह पुतिन या रूस के बारे में समझ बनाने के लिए पश्चिमी मीडिया पर निर्भर नहीं हैं।

‘डिप्लोमेसी का मतलब किसी और को खुश करना नहीं’:

जयशंकर ने कहा कि भारत अपने हितों को प्राथमिकता देता है।“हमें वही करना चाहिए जो भारत के हित में सही है। डिप्लोमेसी का मतलब किसी को खुश करना नहीं, बल्कि अपने हितों की रक्षा है।”उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ भी संबंध मजबूत हैं और दोनों देशों के बीच जल्द ही एक ट्रेड डील संभव है। उनके मुताबिक, अमेरिका के लिए व्यापार प्रमुख मुद्दा है और भारत सही शर्तों पर इसके लिए तैयार है।

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