Rocket Vikram-1:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत स्पेस टेक्नोलॉजी में एक नया इतिहास रच चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस के इंफिनिटी कैंपस में देश के पहले प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 का अनावरण किया। यह रॉकेट छोटे और माइक्रो सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए डिजाइन किया गया है और भारत में निजी स्पेस सेक्टर की शुरुआत का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
जमीन से अंतरिक्ष तक रॉकेट की यात्रा:
पृथ्वी से करीब 100 किलोमीटर ऊपर कार्मन लाइन होती है, जिसे अंतरिक्ष की सीमा माना जाता है। रॉकेट को इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार करते हुए लगभग 28,000 किमी/घंटा की गति प्राप्त करनी होती है। यह गति सिर्फ शक्तिशाली रॉकेट इंजन ही दे सकते हैं।रॉकेट के इंजन में फ्यूल और ऑक्सिडाइज़र मिलकर बेहद गर्म गैसें बनाते हैं, जो तेज गति से नीचे की दिशा में निकलती हैं। न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, गैसों के इस प्रेशर से रॉकेट ऊपर की ओर धक्का पाता है। यही धक्का थ्रस्ट कहलाता है।
रॉकेट कई हिस्सों या स्टेजेज में बना होता है। पहला स्टेज सबसे बड़ा और भारी होता है, जिसमें सबसे ज्यादा ईंधन होता है। जैसे ही इसका ईंधन खत्म होता है, इसे अलग कर दिया जाता है ताकि रॉकेट हल्का होकर आगे तेजी से बढ़ सके। बाद के स्टेज भी क्रमशः अलग होते जाते हैं और अंत में ऊपरी हिस्सा सैटेलाइट को उसकी कक्षा में स्थापित कर देता है।
कैसा है भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1?
स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 का नाम इसरो के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं—
- ऊंचाई : 20 मीटर
- चौड़ाई: 1.7 मीटर
- थ्रस्ट: 1200 kN
- निर्माण: हल्के और मजबूत कार्बन फाइबर से
3D प्रिंटेड कॉम्पोनेंट्स: कई महत्वपूर्ण हिस्से:
क्षमता: एक ही मिशन में कई सैटेलाइट्स को अलग-अलग कक्षा में स्थापित कर सकता है
फास्ट लॉन्चिंग: तेजी से असेंबल और लॉन्च करने में सक्षम।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है, जहां ऑर्बिटल-क्लास लॉन्च व्हीकल प्राइवेट स्तर पर विकसित किए जाते हैं। विक्रम-1 छोटे सैटेलाइट मार्केट के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।








