Putin India Visit:
नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4–5 दिसंबर को भारत के दौरे पर आने वाले हैं। यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बीच रूस भारत से कूटनीतिक समर्थन चाहता है, वहीं भारत रूस के साथ व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को मजबूती देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस दौरे से दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्तों में नई ऊर्जा आने की संभावना जताई जा रही है।
कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर:
पुतिन अपने भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रात्रिभोज करेंगे, राजघाट जाएंगे और कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस भारत–रूस व्यापार को नई दिशा देना है, खासकर तब जब रूस पर पश्चिमी देशों ने कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं और उसका सीमित व्यापारिक नेटवर्क बचा है। भारत अभी भी रूस से तेल और अन्य कई उत्पादों का बड़ा आयातक है, भले ही इसके चलते अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ का नुकसान सहना पड़ रहा है।
रूस के राष्ट्रपति का मुख्य जोर दोनों देशों के व्यापार को अगले पांच वर्षों में 100 अरब डॉलर तक ले जाने पर होगा। रूस ने पहले ही यह संकेत दिया है कि वह भारत के साथ एक ऐसा तंत्र विकसित करना चाहता है जिसमें लेन-देन डॉलर से हटकर केवल रुपये–रूबल में हो। इससे दोनों देश बाहरी आर्थिक दबावों से काफी हद तक मुक्त रह सकेंगे।
पुतिन ने भारत आने से पहले साफ कहा है कि उनकी बातचीत भारत से आयात बढ़ाने और भारतीय उत्पादों को रूसी बाजार में अधिक स्थान देने पर केंद्रित होगी। इसी दिशा में पुतिन नई दिल्ली में होने वाले भारत–रूस बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे, जहां औद्योगिक सहयोग, निवेश और उच्च तकनीकी परियोजनाओं पर चर्चा होगी। रूस चाहता है कि उसके उद्योगों में भारतीय उत्पादों को अधिक जगह मिले और दोनों देश संयुक्त परियोजनाओं पर मिलकर काम करें। इसके अलावा रूस भारत के मानव संसाधन का भी उपयोग करने की इच्छा रखता है। रिपोर्टों के अनुसार, रूस भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों, श्रमिकों और सेवा क्षेत्र के लोगों को अपने यहां बड़े स्तर पर अवसर देने की योजना पर विचार कर रहा है।
भारत का सबसे बड़ा मुद्दा तेल आयात:
भारत के दृष्टिकोण से सबसे बड़ा मुद्दा तेल आयात है। अमेरिकी प्रतिबंधों और अतिरिक्त टैरिफ के कारण भारत पर तेल आयात शुल्क 50% तक पहुंच गया है। ऐसे में भारत चाहेगा कि रूस इस समस्या का समाधान निकाले। पुतिन के दल में रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रोजनेफ्ट और गैजप्रॉमनेफ्ट के अधिकारी भी शामिल होंगे, जिन पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं।
रूस स्वयं भी चाहता है कि उसके तेल निर्यात पर बना अवरोध कम हो। भारत यह भी प्रस्ताव रख सकता है कि ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को रूस के सुदूर पूर्व में चल रहे सखालिन-1 तेल–गैस प्रोजेक्ट में 20% हिस्सेदारी दी जाए, जिससे भारत के ऊर्जा हित सुरक्षित रह सकें। कुल मिलाकर पुतिन का यह भारत दौरा व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग में कई अहम संभावनाओं को मजबूत कर सकता है। दोनों देश ऐसे समय में एक-दूसरे के बड़े साझेदार के रूप में उभर रहे हैं जब दुनिया में नई ध्रुवीयताएँ बन रही हैं।








