President Draupadi Murmu
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में बढ़ती साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसके लिए स्कूलों के पाठ्यक्रम में डिजिटल व वित्तीय साक्षरता को शामिल किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मू ओडिशा सरकार द्वारा ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क (GFTN) के सहयोग से आयोजित ‘ब्लैक स्वान समिट’ को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि तकनीक ने अर्थव्यवस्था और समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के रूप में लोगों की जीवन भर की कमाई छीन रहा है। इससे पीड़ितों को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को कम उम्र से ही तकनीक के फायदे और जोखिमों की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे सुरक्षित डिजिटल नागरिक बन सकें।
राष्ट्रपति ने बताया
राष्ट्रपति ने बताया कि डिजिटल धोखाधड़ी रोकने और शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली और साइबर धोखाधड़ी निवारण केंद्र जैसे कई अहम कदम उठाए हैं। तेजी से बदलती तकनीक पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि नए आविष्कार जहां नवाचार और विकास को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं साइबर सुरक्षा खतरे, डीपफेक, गलत सूचना और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा
फिनटेक और वित्तीय समावेशन पर बात करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बीते दस वर्षों में भारत की वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब किसान, छोटे दुकानदार और महिलाएं भी डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं का आसानी से उपयोग कर पा रहे हैं। उन्होंने महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि फिनटेक इकोसिस्टम को महिलाओं को सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि लीडर, प्रोफेशनल और उद्यमी के रूप में भी देखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि दूर-दराज, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई लोग डिजिटल साधनों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसे लोगों को डिजिटल कौशल देना जरूरी है, ताकि वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। अंत में राष्ट्रपति ने उद्यमियों से अपील की कि वे तकनीक को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का माध्यम बनाएं।
















