Jan Dhan Yojana:
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शुरू हुआ डिजिटल इंडिया मिशन आज देश को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। 2014 में जब इस मिशन की नींव रखी गई, तब लक्ष्य था हर नागरिक तक तकनीक की आसान पहुंच सुनिश्चित करना। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े और तेज़ी से बढ़ते डिजिटल बाज़ारों में से एक है।
इंटरनेट और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
2014 में जहां केवल 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे, वहीं 2025 में यह संख्या 97 करोड़ पहुंच गई। 42 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर केबल ने गांव-गांव तक डिजिटल पहुंच बनाई। भारतनेट परियोजना के तहत 2 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड सुविधा पहुंची।
UPI बना ग्लोबल मॉडल
2016 में लॉन्च हुआ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भारत की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति साबित हुआ। हर महीने 17 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन इसके जरिए होते हैं। सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले से लेकर बड़े व्यापारी तक क्यूआर कोड से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। सिंगापुर, फ्रांस और यूएई जैसे देशों ने भी UPI को अपनाया है।
JAM ट्रिनिटी और बैंकिंग क्रांति
जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) की बदौलत अब तक 55 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए। इससे सीधा लाभ ट्रांसफर संभव हुआ और लाखों लोग बैंकिंग से जुड़े।
शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन में बदलाव
कोरोना काल में दीक्षा और स्वयं प्लेटफॉर्म ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। CoWIN पोर्टल से 140 करोड़ वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड बनाया गया। वहीं आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने हेल्थ सेक्टर को डिजिटल आईडी से जोड़ा।डिजिलॉकर और डिजियात्रा ने दस्तावेज़ और यात्रा को पेपरलेस बनाया, जबकि GeM पोर्टल ने छोटे व्यापारियों को सरकारी बाज़ार तक पहुंच दी।
कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार
ई-नाम ने राज्यों की कृषि मंडियों को जोड़ा और किसानों को बेहतर दाम दिलाए। डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड ने किसानों को फसल चयन में मदद दी।
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