Perplexity AI:
नई दिल्ली,एजेंसियां। AI आधारित सर्च प्लेटफॉर्म Perplexity AI अब भारत में एक बड़ा और पारदर्शिता बढ़ाने वाला फीचर पेश करने जा रहा है। कंपनी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास (Aravind Srinivas) ने घोषणा की है कि जल्द ही Perplexity AI भारतीय राजनीतिक नेताओं की शेयर मार्केट होल्डिंग्स (Stock Holdings) दिखाने वाला नया फीचर लॉन्च करेगा। यह फीचर अभी संयुक्त राज्य अमेरिका (US) में उपलब्ध है और अगले कुछ हफ्तों में इसे भारत के NSE और BSE से जुड़े स्टॉक्स के लिए भी रोलआउट किया जाएगा।
पहले से US में उपलब्ध है यह फीचर
Perplexity Finance फिलहाल अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) के सदस्यों की शेयर होल्डिंग्स और हाल के ट्रांजैक्शंस की जानकारी प्रदान करता है। यहां लगभग 600 से अधिक कांग्रेस सदस्यों का डेटा STOCK Act के तहत सार्वजनिक किया गया है। इससे अमेरिकी यूजर्स को यह समझने में आसानी होती है कि कौन सा नेता किन कंपनियों में निवेश करता है और उनकी आर्थिक रुचियां कहां तक फैली हैं। यह फीचर निवेशकों के लिए राजनीतिक-आर्थिक संबंधों की पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
भारत में लॉन्च से बढ़ेगी पारदर्शिता
भारत में इस फीचर के आने से स्टॉक मार्केट एनालिसिस और ज्यादा पारदर्शी होगा। अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि राजनीतिक नेताओं के निवेश किन कंपनियों में हैं। अगर यह डेटा साफ तौर पर उपलब्ध होगा, तो यह न सिर्फ निवेशकों बल्कि सामान्य नागरिकों के लिए भी जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि राजनीतिक प्रभाव और कंपनियों के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध है या नहीं।
NSE और BSE स्टॉक्स पर भी मिलेगा डेटा
Perplexity AI के सीनियर टीम मेंबर जेफ ग्राइम्स (Jeff Grimes) ने बताया कि कंपनी भारतीय शेयर बाजारों (NSE और BSE) के पेज पर भी यह जानकारी जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसका मतलब यह हुआ कि अब भारतीय यूजर्स भी रियल-टाइम में भारतीय नेताओं की शेयर होल्डिंग्स देख सकेंगे।
निवेशकों और युवाओं के लिए गेमचेंजर
भारत में तेजी से बढ़ रही Gen-Z और युवा ट्रेडर्स की निवेश रुचि को देखते हुए यह फीचर एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे रिसर्च अधिक सटीक होगी, बायस (Bias) कम होंगे और निवेशक यह बेहतर समझ पाएंगे कि उन्हें अपने पैसे कहां और क्यों लगाना चाहिए।Perplexity AI का यह कदम न केवल टेक्नोलॉजी और ट्रांसपेरेंसी का बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि यह भारत में राजनीति और वित्तीय जगत के बीच पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकता है।
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