BLA-Majid Brigade:
नई दिल्ली, एजेंसियां। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। दोनों देशों ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसके सुसाइड विंग मजीद ब्रिगेड को 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल करने के लिए संयुक्त प्रस्ताव पेश किया था, जिसे अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने रोक दिया। पश्चिमी देशों ने इस कदम को इन संगठनों के अल-कायदा और आईएसआईएल से जुड़े होने के पर्याप्त सबूत न होने का हवाला देते हुए तकनीकी रूप से अवरुद्ध किया।
अमेरिका का यह कदम
अमेरिका का यह कदम एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। पहले अमेरिका ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड को अपनी राष्ट्रीय सूची में विदेशी आतंकवादी संगठनों के रूप में नामित किया था। इसके बाद पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में इसे सूचीबद्ध कराने की कोशिश की, जिससे पाकिस्तान के भारत पर लगाए जाने वाले आरोपों को बल मिलता। लेकिन अमेरिका की तकनीकी रोक ने इस प्रयास को विफल कर दिया, जो पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए झटका साबित हुआ।
इस कदम के माध्यम से अमेरिका ने चीन के द्वारा आतंकवादियों पर लगाए जाने वाले ब्लॉकेज की नीति के समान तकनीकी रोक का इस्तेमाल किया। इससे यह संदेश भी गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने में ठोस सबूत की आवश्यकता है।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) 2000 में स्थापित हुई और इसके 6,000 से अधिक प्रशिक्षित सैनिक हाईटेक हथियारों से लैस हैं। पाकिस्तान सरकार ने 2006 से इसे प्रतिबंधित किया हुआ है। बलूचिस्तान में स्थानीय लोग खनिज संसाधनों के दुरुपयोग और गरीबी के कारण पाकिस्तान और चीन दोनों के प्रति नाराज हैं।
इतिहास की दृष्टि से बलूचिस्तान स्वतंत्र रियासतों में शामिल था और 1947 में इसे पाकिस्तान के साथ विलय करने के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया। 1948 में पाकिस्तानी सेना ने कलात समेत पूरे बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया। अब यह क्षेत्र पाकिस्तान और चीन के लिए एक संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
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