World Bamboo Day 2025:
नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल 18 सितंबर को वर्ल्ड बैंबू डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को बांस के महत्व और उसके बहुउपयोगी गुणों से अवगत कराना है। बांस न केवल तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है, बल्कि इसके औषधीय और पोषण संबंधी फायदे भी कई हैं। भारत में बांस की 136 प्रजातियां पाई जाती हैं और यह खेती के लिहाज से भी बेहद अहम है।
बिरयानी से लेकर मछली तक – बांस में पके अनोखे व्यंजन
बांस में सबसे लोकप्रिय डिश बैंबू बिरयानी है, जिसे खासतौर पर आंध्र प्रदेश, असम और कर्नाटक में बड़े शौक से खाया जाता है। बांस के खोखले तने में बिरयानी को पकाने से इसका स्वाद और सुगंध कई गुना बढ़ जाते हैं।
लेकिन बिरयानी के अलावा भी कई डिशेज बांस में पकाई जाती हैं।
बैंबू फिश: मसालों में मेरिनेट की गई मछली को बांस के अंदर भरकर कोयले की धीमी आंच पर पकाया जाता है।
बैंबू चिकन: चिकन को मसालों के साथ बांस में बंद कर 30-40 मिनट तक कोयले पर पकाया जाता है। इससे चिकन बेहद सॉफ्ट और फ्लेवरफुल बनता है।
पिट्टू: श्रीलंका की मशहूर डिश, जिसे चावल और नारियल के मिश्रण से तैयार कर बांस के अंदर स्टीम किया जाता है। इसे गोल आकार में काटकर सर्व किया जाता है।
बांस में पकाने के फायदे
बांस के तने में मौजूद बैंबू शूट्स पोषण से भरपूर होते हैं। इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे वजन कम करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह हार्ट हेल्थ, हड्डियों की मजबूती और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है।इस तरह बांस न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि इससे बने व्यंजन स्वाद और सेहत दोनों का अनोखा संगम पेश करते हैं।
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