Nipah virus: निपाह वायरस पर NCDC की सफाई, पश्चिम बंगाल में सिर्फ 5 नहीं 2 ही मामले

Anjali Kumari
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Nipah virus

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर हाल के दिनों में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स ने लोगों में चिंता बढ़ा दी थी। कई रिपोर्ट्स में राज्य में निपाह वायरस के पांच मामलों की बात कही गई, लेकिन अब नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। NCDC के अनुसार, दिसंबर 2025 से अब तक पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के केवल दो ही मामले लैब जांच के बाद पुष्ट हुए हैं।

NCDC और स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि स्थिति फिलहाल पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बिना पुष्टि के आंकड़े सामने रखे गए, जिससे भ्रम और डर की स्थिति बनी। संस्था ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।

गलत आंकड़ों पर NCDC का खंडन

NCDC ने स्पष्ट किया कि किसी भी संदिग्ध मामले को तब तक निपाह वायरस का संक्रमण नहीं माना जाता, जब तक उसकी लैब जांच से पुष्टि न हो जाए। संस्था के मुताबिक, पांच मामलों का दावा तथ्यहीन और भ्रामक है। गलत आंकड़ों के प्रसार से न सिर्फ आम लोगों में डर बढ़ता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अनावश्यक दबाव पड़ता है।

कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जांच पूरी

दो पुष्ट मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए 196 लोगों की पहचान कर उनकी जांच कराई गई। राहत की बात यह है कि सभी 196 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। स्वास्थ्य टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और किसी भी नए लक्षण पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।

सरकार की तैयारियां और अपील

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर निपाह वायरस के प्रसार को रोकने के लिए तय रणनीति पर काम कर रही हैं। अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और स्वास्थ्य कर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और सतर्कता बरतने की अपील की है।

निपाह वायरस कितना खतरनाक?

विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है, जो फल चमगादड़ों या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैल सकता है। फिलहाल इसका कोई टीका या विशेष इलाज नहीं है, इसलिए समय पर पहचान और सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।

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