New Pandemic Alert: क्या फिर लौट सकता है कोरोना जैसा दौर? दो नए वायरस ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता

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नई दिल्ली, एजेंसियां। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को यह सिखा दिया कि कोई भी नया वायरस कितनी तेजी से वैश्विक संकट बन सकता है। अब वैज्ञानिक एक बार फिर संभावित नई महामारी को लेकर अलर्ट कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन, तेज शहरीकरण और इंसानों व जानवरों के बीच बढ़ता संपर्क नई संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में दो नए वायरस—इन्फ्लूएंजा-डी वायरस और कैनिन कोरोनावायरस—वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।

जानवरों से इंसानों तक फैलने का खतरा

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के वैज्ञानिकों की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दोनों वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने की क्षमता रखते हैं। अगर भविष्य में इनमें इंसान-से-इंसान फैलने की क्षमता विकसित हो जाती है, तो ये कोरोना जैसी महामारी का रूप ले सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि फिलहाल इन वायरस पर पर्याप्त निगरानी और रिसर्च नहीं हुई है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

इन्फ्लूएंजा-डी वायरस क्यों है खतरनाक?

इन्फ्लूएंजा-डी वायरस की पहचान पहली बार साल 2011 में हुई थी। यह मुख्य रूप से गायों और सूअरों में पाया जाता है, लेकिन हिरण, जिराफ और कंगारू जैसे जंगली जानवरों में भी इसके प्रमाण मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बोवाइन रेस्पिरेटरी डिजीज का कारण बन सकता है। चीन में हाल के अध्ययनों में इसके कुछ स्ट्रेन इंसान-से-इंसान फैलने की क्षमता वाले पाए गए हैं। अमेरिका के फ्लोरिडा में मवेशी श्रमिकों पर किए गए अध्ययन में 97 प्रतिशत लोगों में इसके एंटीबॉडी पाए गए, जिससे संकेत मिलता है कि संक्रमण पहले ही फैल चुका है, भले ही लक्षण न दिखे हों।

कैनिन कोरोनावायरस भी बना चिंता का कारण

कैनिन कोरोनावायरस (CCoV) आमतौर पर कुत्तों में पेट से जुड़ी बीमारी पैदा करता है। हालांकि यह कोविड-19 के लिए जिम्मेदार SARS-CoV-2 से अलग है, लेकिन इसके कुछ स्ट्रेन इंसानों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में इसके कई मामले सामने आ चुके हैं। 2017 में एक व्यक्ति और 2018 में मलेशिया में एक बच्चे में इसके संक्रमण की पुष्टि हुई थी, जिसमें श्वसन संबंधी लक्षण देखे गए।

वैज्ञानिकों की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों वायरस पर समय रहते निगरानी, जांच और इलाज के तरीकों को विकसित करना बेहद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो दुनिया एक बार फिर गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर सकती है। वैज्ञानिकों का साफ कहना है—कोरोना से मिले सबक को भूलना भारी पड़ सकता है।

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