NEET PG Controversy: NEET PG में जीरो परसेंटाइल एंट्री पर बवाल, NBEMS के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL

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NEET PG Controversy:

नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट पीजी 2025 को लेकर एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने सभी कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल में भारी कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है और कई डॉक्टरों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।

कटऑफ घटाने का फैसला क्यों?

NBEMS के मुताबिक, राउंड-2 काउंसलिंग के बाद भी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में करीब 18,000 से अधिक पीजी सीटें खाली रह गई थीं। इन्हीं सीटों को भरने के लिए सभी श्रेणियों की कटऑफ घटाने का निर्णय लिया गया।

नई क्वालिफाइंग परसेंटाइल क्या है?

संशोधित नियमों के तहत EWS उम्मीदवारों के लिए परसेंटाइल 50 से घटाकर 7 कर दी गई है। जनरल और PwBD वर्ग के लिए यह 45 से घटाकर 5 कर दी गई है, जबकि SC, ST और OBC वर्ग के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल शून्य (0) कर दी गई है। इसी फैसले ने सबसे ज्यादा विवाद खड़ा किया है।

डॉक्टरों और विशेषज्ञों की आपत्ति

इस फैसले के खिलाफ सोशल वर्कर हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन डॉ. सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. आकाश सोनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। डॉ. लक्ष्य मित्तल ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह फैसला मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर करता है और इससे निजी कॉलेजों को फायदा पहुंच सकता है।

उठ रहे गंभीर सवाल

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि जीरो परसेंटाइल से एडमिशन देने से मरीजों की सुरक्षा, मेडिकल प्रोफेशन की गुणवत्ता और मेरिट सिस्टम पर गंभीर असर पड़ सकता है। मेहनती छात्रों के साथ अन्याय और पूरे सिस्टम पर भरोसा टूटने की आशंका भी जताई जा रही है।

आगे क्या?

अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा कि कटऑफ में की गई यह ऐतिहासिक कटौती बरकरार रहेगी या इसमें बदलाव होगा।

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