Mosque-Madrasa Dispute:
हैदराबाद, एजेंसियां। हैदराबाद के सुल्तानपुर इलाके में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद हुसैनी और उससे जुड़े मदरसा दारुल उलूम नूमानिया के खिलाफ राजनीतिक और साम्प्रदायिक विवाद खड़ा हो गया है। पिछले छह महीनों से यह मामला सुर्खियों में है। विवाद का केंद्र करीब 300 साल पुरानी मस्जिद और उससे जुड़ी लगभग 8 एकड़ 18 गुंटा भूमि का स्वामित्व है।
विवाद का कारण
Mosque-Madrasa Dispute:
बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि मदरसा अवैध रूप से चल रहा है और इसे बंद किया जाना चाहिए। वहीं, मदरसे के मौलाना अकबर खान का दावा है कि वे पिछले सात सालों से मस्जिद में मदरसा चला रहे हैं और उन्होंने इसे दस साल के पट्टे पर लिया है। अकबर खान का आरोप है कि बीजेपी के राज्य सचिव रामकृष्ण रेड्डी और पार्टी कार्यकर्ता मदरसे को बंद कर जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं।
बीजेपी का कहना
Mosque-Madrasa Dispute:
बीजेपी का कहना है कि विवादित जमीन का एक बड़ा हिस्सा अब गैर-मुस्लिमों के हाथ में चला गया है, जबकि मदरसा और मस्जिद अभी भी 1,000 वर्ग गज क्षेत्र में मौजूद हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि मदरसे में रोहिंग्या छात्रों को रखा गया है, जबकि वास्तविक छात्र तेलंगाना के ग्रामीण और शहरी इलाकों के हैं।
विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक हलचल
Mosque-Madrasa Dispute:
कॉलोनी के लोग और बीजेपी कार्यकर्ता मिलकर मदरसे को बंद करने की मांग कर रहे हैं। मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) ने हिंदूवादी संगठनों पर मस्जिद परिसर में चल रहे मदरसे को बंद कराने की कोशिश का आरोप लगाया।
वक्फ बोर्ड की भूमिका
Mosque-Madrasa Dispute:
तेलंगाना वक्फ बोर्ड ने अभी तक भूमि के मालिकाना हक और विवाद पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। इस चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वास्तव में मस्जिद की जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है या किसी और के कब्जे में चली गई है।
इस विवाद ने सुल्तानपुर इलाके में सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। मामले का हल वक्फ बोर्ड, स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच तय होने की उम्मीद है।
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