MNREGA workers protest
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को समाप्त कर उसकी जगह ‘जी राम जी योजना’ लागू किए जाने के फैसले के खिलाफ श्रमिकों का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को मनरेगा कानून के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर देशभर से सैकड़ों श्रमिक दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जी राम जी योजना को वापस लेकर मनरेगा को फिर से लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने दी चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा संसद सत्र के दौरान सरकार ने जी राम जी योजना को वापस लेने की घोषणा नहीं की, तो वे संसद घेरने के लिए मजबूर होंगे। श्रमिकों का कहना है कि मनरेगा केवल रोजगार देने की योजना नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है।
मनरेगा संघर्ष समिति और विभिन्न श्रमिक संगठनों के नेताओं ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में मनरेगा ने करोड़ों मजदूरों को गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराया, जिससे न केवल उनकी आजीविका सुरक्षित रही, बल्कि देश की आपूर्ति व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिला। नेताओं के अनुसार, अगर मनरेगा नहीं होती तो महामारी के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी बदतर हो सकते थे।
संयोजक धीरज गाबा ने कहा
मनरेगा बचाओ मोर्चा के संयोजक धीरज गाबा ने कहा कि मनरेगा की जगह जी राम जी योजना लाना किसी भी तरह का सुधार नहीं है, बल्कि यह दशकों की मेहनत से हासिल किए गए मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। वहीं, मोर्चा के नेता प्रबल प्रताप शाही ने ‘विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण), 2025’ को ग्रामीण और खेतिहर मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उन्होंने मांग की कि सरकार न केवल इस कानून को रद्द करे, बल्कि लेबर कोड को भी समाप्त करने की घोषणा करे।श्रमिक संगठनों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा।












